नए नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट, अल्ट्रासाउंड तरंगों के साथ विजन लॉस का इलाज होगा होगा संभव? पढ़ें ये स्टडी
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नए नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट, अल्ट्रासाउंड तरंगों के साथ विजन लॉस का इलाज होगा होगा संभव? पढ़ें ये स्टडी

अक्सर बढ़ती उम्र में आंखों से संबंधित समस्याएं होने का जोखिम बढ़ जाता है. दृष्टि दोष, मैक्युलर डिजनरेशन, रेटिना से संबंधित समस्याएं बढ़ती उम्र में कॉमन हो जाती हैं. दुनिया भर में दृष्टिबाधित (vision impaired) लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. आज भी आंखों की गंभीर समस्या जैसे रेटिनल डिजेनरेटिव डिजीज के इलाज में इंवेसिव सर्जरी की जरूरत पड़ती है. इंवेसिव सर्जरी में आंख के अंदर इलेक्ट्रोड उपकरणों के आरोपण (Implantation) की आवश्यकता होती है. ऐसे में दृष्टि हानि या विजन लॉस के आसान इलाज के लिए आवश्यक नॉन-सर्जिकल समाधान की बेहद जरूरत है. अल्ट्रासाउंड वेव या तरंगें विजिन लॉस के इलाज में आने वाले दिनों में कारगर साबित हो सकती हैं, क्योंकि यह एक नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट है.

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इंटरेस्टिंगइंजीनियरिंग डॉट कॉम में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, आज चिकित्सा प्रौद्योगिकी में अल्ट्रासाउंड का उपयोग हर दिन व्यापक होता जा रहा है. दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (USC) में एक शोध दल इलाज के लिए एक नया मॉडल विकसित कर रहा है, जो अल्ट्रासाउंड तरंगों (Ultrasound waves) के साथ रेटिना न्यूरॉन्स (retinal neurons) को उत्तेजित कर सकता है. दुनिया भर में जहां बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है, उससे आंखों की बीमारी के उपचार के इस नए तरीके से एक्सपर्ट्स की उम्मीदें पॉजिटिव रूप से बढ़ी हैं.

अधिकतर लोगों में होती है रेटिनल डिजेनरेटिव डिजीज
कई लोगों में रेटिना अपक्षयी रोग (retinal degenerative diseases) होने की संभावना होती है. इस रोग में रेटिना में प्रकाश के प्रति संवेदनशील रिसेप्टर्स का प्रॉग्रेसिव डिजेनरेशन होता है. रेटिनल डिजेनरेशन जिसमें प्रॉग्रेसिव गिरावट और फोटोरिसेप्टर के कार्य की हानि शामिल है, दुनिया भर में स्थायी दृष्टि हानि का एक प्रमुख कारण है. इस डिसऑर्डर के लिए फिलहाल कोई भी नॉन-इंवेसिव ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं है, इसलिए नई तकनीक जो दृष्टि हानि को रोक सके, उसकी आवश्यकता अभी भी बनी हुई है. ऐसे में दृष्टि हानि के आसान उपचार में ये नई तकनीक आवश्यक नॉन-सर्जिकल समाधान हो सकता है.

यूएससी में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और ऑप्थल्मोलॉजी के प्रोफेसर किफा झोउ का कहना है कि फिलहाल हम जानवरों पर अध्ययन करके देख रहे हैं, जिसमें विद्युत उत्तेजना (electric stimulation) को रिप्लेस करने के लिए अल्ट्रासाउंड उत्तेजना (ultrasound stimulation) का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं.

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रेटिना को उत्तेजित करना
इस उपचार में एक पहनने योग्य अल्ट्रासाउंड डिवाइस प्रदान किया जाएगा, जो आंख पर यांत्रिक दबाव (mechanical pressures) लगाकर रेटिना को उत्तेजित करेगा, जिससे न्यूरॉन सक्रिय होंगे और मस्तिष्क को संकेत भेजेंगे. आंख के रेटिना में मौजूद न्यूरॉन्स में यांत्रिक रूप से संवेदनशील चैनल होते हैं, जो यांत्रिक उत्तेजना (mechanical stimulation) का जवाब देते हैं. जब यांत्रिक दबाव उत्पन्न करने के लिए अल्ट्रासाउंड का उपयोग करते हैं, तो ये न्यूरॉन्स सक्रिय होते हैं.

ब्लाइंड चूहे पर किया गया टेस्ट
इसके लिए शोधकर्ताओं ने एक ब्लाइंड चूहे का इस्तेमाल किया. उसकी आंखों को उत्तेजित करने के लिए उच्च आवृत्ति वाली अल्ट्रासाउंड तरंगों (high-frequency ultrasound waves) का इस्तेमाल किया. उन्होंने आंख के एक विशिष्ट क्षेत्र पर पैटर्न का अनुमान लगाया, लेकिन चूंकि, चूहा वैज्ञानिकों को यह बताने में असमर्थ है कि वह क्या देख रहा था, टीम ने चूहे के विजुअल कॉरटेक्स की गतिविधि को इलेक्ट्रोड सरणी (electrode array) के जरिए मापा. अंत में, यह पता चला कि चूहे ने उन विजुअलाइजेशन को माना जो आंखों के सामने पेश किए गए थे.

रेटिनल डिजेनरेटिव डिजीज में अल्ट्रासाउंड तरंगों का काम
फोर्टिस हीरानंदानी हॉस्पिटल (मुंबई) के डायरेक्टर-डीओवीएस आई इंस्टीट्यूट डॉ. हर्षवर्धन घोरपड़े कहते हैं कि अल्ट्रासाउंड तरंगें (Ultrasound waves) वे रेडियो तरंगें होती हैं, जो उच्च आवृत्ति ध्वनि उत्पन्न करने वाली मशीन द्वारा उत्पन्न होती हैं. अल्ट्रासाउंड तरंगों का उपयोग नेत्र विज्ञान में फेकोमल्सिफिकेशन केटारेक्ट सर्जरी और रेटिना की सर्जरी जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है. रेटिनल डिजेनरेटिव डिजीज आंखों की वह स्थिति है, जहां वृद्धावस्था या अनुवांशिक रोगों के कारण विजन ट्रांसमिटिंग सेल्स, रॉड्स और कोन्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. अल्ट्रासाउंड तरंगें मस्तिष्क को आवेग भेजने के लिए रॉड्स और कोन्स को उत्तेजित करती हैं और इस प्रकार आंखों की रोशनी खो चुके एक व्यक्ति में दृश्य प्रभाव उत्पन्न करती हैं. हमारे देश में इसके लगभग दो साल बाद उपलब्ध होने की उम्मीद है.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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