डिलीवरी के बाद डिप्रेशन की शिकार हैं तो ये 5 तरीके उबरने में मदद करेंगे
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डिलीवरी के बाद डिप्रेशन की शिकार हैं तो ये 5 तरीके उबरने में मदद करेंगे | health – News in Hindi

नौ महीने शिशु को गर्भ में रखने के बाद जब वह इस दुनिया में आता है तो मां के दिल में अनगिनत भावनाएं उमड़ती हैं. इन भावनाओं में खुशी से लेकर डर, दुख और निराशा जैसी मनोदशा भी शामिल हैं. अगर बच्चे के जन्म के बाद मां के दुखी रहने का एहसास गंभीर होता जाए तो रोजमर्रा की जिंदगी में दखल देने लगता है. यह वही समय है जब मां पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) का अनुभव कर रही है. myUpchar के डॉ. विशाल मकवाना का कहना है कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन यानी डिलीवरी के बाद डिप्रेशन (Depression) की स्थिति है, जिसमें अत्यधिक उदासी, ऊर्जा में कमी, चिंता, सोने या खाने की दिनचर्या में बदलाव, बात-बात पर रोना और चिड़चिड़ापन आदि लक्षण हो सकते हैं. इसकी शुरुआत प्रसव (Delivery) के एक सप्ताह या एक महीने बाद होती है.

इस स्थिति का सही कारण अभी तक ज्ञात नहीं है लेकिन हार्मोन में बदलाव और नींद की कमी इसके बड़े कारक हैं. इस स्थिति के कारण बच्चों से जुड़ाव महसूस करने में भी परेशानी होती है, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है और बच्चे पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके निदान और उपचार करने का सबसे प्रभावी तरीका डॉक्टर के पास जाना है. साइकोथेरेपी, एंटीडिप्रेसेंट्स या दोनों से संयुक्त रूप लाभ उठा सकते हैं. घर पर भी कुछ ऐसे उपाय अपनाए जा सकते हैं जो इस तरह के डिप्रेशन से निकालने में मदद करेंगे और जल्दी रोजमर्रा की जिंदगी को पटरी पर लाएंगे.

व्यायाम करेंशोधकर्ताओं के मुताबिक व्यायाम का पोस्टपार्टम डिप्रेशन वाली महिलाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. पैदल चलना डिप्रेशन को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है. डिलीवरी के बाद ज्यादा लंबा और भारी व्यायाम नहीं किया जा सकता है, लेकिन 10 मिनट व्यायाम करने की कोशिश करें. इसमें साधारण वर्कआउट करें और किसी तरह के उपकरण का इस्तेमाल न करें. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि उदास मनोदशा को ठीक करने के लिए सुबह ध्यान करें और धीरे-धीरे गहरी सांस लें. फिर सुबह टहल भी सकती हैं.

स्वस्थ आहार
स्वस्थ भोजन अकेले पोस्टपार्टम डिप्रेशन की स्थिति से छुटकारा नहीं दिला सकता है, लेकिन फिर भी पोषण से भरपूर आहार खाने की आदत डालने से बेहतर महसूस होने में मदद मिलेगी और शरीर को भी जरूरी पोषक तत्व मिलेंगे.

खुद के लिए समय निकालें

बच्चे की देखभाल, बार-बार स्तनपान, घर के काम में लगे रहना या फिर बड़े बच्चों की जिम्मेदारियां तनाव का कारण बन सकती हैं. इन सबसे अकेले सामना करने की बजाए घर वालों की मदद लें, जो कि बच्चे को एक या दो घंटे के लिए संभालें ताकि खुद के लिए समय निकाल सकें. इस समय को योग, मेडिटेशन करने, झपकी लेने या फिर कोई फिल्म देखने में भी बिता सकती हैं.

आराम के लिए वक्त जरूरी
नींद की कमी बहुत सारी गड़बड़ियां पैदा करती है, तभी तो कहा जाता है कि बच्चा सो जाए तो मां को भी नींद ले लेनी चाहिए. यह सलाह बड़ी पुरानी लग सकती है, लेकिन इसमें विज्ञान है.

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अकेलेपन से बचें
कई अध्ययनों में साबित हो चुका है कि अपनी भावनाओं के बारे में बात करने से मूड में भी बदलाव होता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि उन नई मांओं में डिप्रेशन का स्तर कम था, जिन्होंने उन अनुभवी मांओं से नियमित रूप से बातें कीं जो कि पहले पोस्टपार्टम डिप्रेशन की शिकार रह चुकी हैं. इसलिए बात करते रहें.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, डिलीवरी के बाद सूजन पढ़ें।

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