डायबिटीज से संबंधित इन 5 मिथ्स पर कहीं आप भी तो नहीं करते यकीन? – News18 हिंदी
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डायबिटीज से संबंधित इन 5 मिथ्स पर कहीं आप भी तो नहीं करते यकीन? – News18 हिंदी

Diabetes related Myths-Facts: मधुमेह (Diabetes) से आज लाखों लोग देश में ग्रस्त हैं और लगातार इसके मरीजों की संख्या बढ़ रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में होने वाली कुल मौतों में से 2 फीसदी मौतों के लिए सिर्फ डायबिटीज जिम्मेदार है. डायबिटीज एक क्रोनिक कंडीशन है, जिसमें ब्लड शुगर लेवल हाई हो जाता है. इसका निदान करके इसे कंट्रोल में ना रखा जाए, तो सेहत संबंधित कई अन्य गंभीर रोगों को जन्म दे सकता है. इससे उच्च रक्तचाप, किडनी की बीमारी, हृदय रोग भी हो सकता है. डायबिटीज से संबंधित कुछ मिथ्स भी लोगों में फैले हुए हैं. कुछ लोग सोचते हैं कि डायबिटीज हो जाए, तो कभी ठीक नहीं होती या फिर पेरेंट्स को है, तो बच्चे को भी होगा आदि. आइए जानते हैं डायबिटीज से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथ्स के बारे में यहां.

मिथ 1- एक बार डायबिटीज हो जाए तो कभी ठीक नहीं होती

फैक्ट- मेट्रोपॉलिसइंडिया की खबर के अनुसार, प्रारंभिक अवस्था में डायबिटीज को कम किया जा सकता है. यदि आप प्रॉपर डाइट लें, प्रतिदिन एक्सरसाइज करें, तो यह कंट्रोल हो सकता है, खासकर युवाओं में. यदि ब्लड शुगर बिना किसी इलाज के नॉर्मल रहता है, तो ऐसा माना जाता है कि डायबिटीज खत्म हो गया है. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि डायबिटीज रोगी हमेशा इसका रोगी बना रहेगा. हां, ब्लड शुगर कंट्रोल में ना रखा जाए, तो डायबिटीज होने का खतरा हमेशा बना रहता है. हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाकर आप डायबिटीज से बचे रह सकते हैं.

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मिथ 2- डायबिटीज के रोगी चीनी नहीं खा सकते

फैक्ट- डायबिटीज से संबंधित लोगों में व्याप्त यह सबसे कॉमन मिथ है. लोग ये सोचते हैं कि जीवनभर डायबिटीज रोगियों को शुगर-फ्री डाइट पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन ऐसा नहीं है. एक डायबिटीज के रोगी को हर कुछ बैलेंस में लेने की जरूरत होती है, जिसमें सीमित मात्रा में चीनी या मीठी चीजों को भी शामिल कर सकते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि डायबिटीज रोगी पूरी तरह से चीनी खाना छोड़ दें.

मिथ 3- टाइप 2 डायबिटीज सिर्फ मोटे लोगों को होती है

फैक्ट- डायबिटीजडॉटकोडॉटयूके की खबर के अनुसार, ऐसा नहीं है कि टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) सिर्फ मोटे लोगों को ही होती है. टाइप 2 डायबिटीज एक लाइफस्टाइल संबंधित समस्या है, जिसमें कई फैक्टर्स इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. काफी हद तक यह मोटापे से जुड़ा होता है, लेकिन ऐसा भी नहीं कि यह बीमारी सिर्फ मोटापे से ग्रस्त लोगों को ही प्रभावित करती है. टाइप 2 मधुमेह वाले लगभग 20% लोगों का वजन सामान्य या कम होता है.

मिथ 4- पेरेंट्स को डायबिटीज है, तो बच्चों को भी होगा

फैक्ट- बेशक, डायबिटीज होने का फैमिली हिस्ट्री के साथ एक मजबूत संबंध होता है, लेकिन यह कई अन्य जोखिम कारकों जैसे बढ़ती उम्र, मोटापा, फिजिकल एक्टिविटी में कमी, एक्सरसाइज ना करना, खानपान में लापरवाही से भी हो सकती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि पारिवारिक इतिहास ही मधुमेह होने का एकमात्र जोखिम कारक है, लेकिन सच्चाई यह भी है कि जिनके परिवार में किसी को डायबिटीज नहीं है, वहां भी यह रोग होता है. एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप पूरी जिंदगी डायबिटीज से खुद को बचाए रख सकते हैं. इतना ही नहीं, टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे के बीच स्पष्ट अनुवांशिक संबंध है. इसमें जीन (Genes) निष्क्रिय होते हैं, लेकिन व्यक्ति की लाइफस्टाइल, डाइट, तनाव से ये जींस सक्रिय हो जाते हैं. हालांकि, हेल्दी डाइट, जीवनशैली, स्ट्रेस कम करके इन जींस को फिर से निष्क्रिय किया जा सकता है. डायबिटीज रोगियों के बच्चे आमतौर पर स्वस्थ होते हैं. 45 वर्ष की आयु के बाद ही उन्हें टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना रहती है. ऐसे मामलों में टाइप 2 डायबिटीज सिर्फ 15-20 प्रतिशत लोगों को ही प्रभावित करती है.

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मिथ 5- मधुमेह एक संक्रामक रोग है

फैक्ट- यह पूरी तरह से गलत है. डायबिटीज कोई संक्रामक बीमारी नहीं हैं. इसे एक गैर-संचारी बीमारी (non-communicable Disease) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसका मतलब होता है कि इससे ग्रस्त व्यक्ति के छींकने, उसे छूने से नहीं फैलता है. एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के जरिए यह नहीं हो सकता है. सिर्फ डायबिटीज ग्रस्त पेरेंट्स के जरिए ही बच्चे को डायबिटीज हो सकती है, क्योंकि इसमें जींस महत्वपूर्ण भूमिक निभा सकती है.

Tags: Diabetes, Health, Health tips, Lifestyle

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