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जानें ड्यूटी के दौरान डॉक्टर्स को किस तरह की चुनौतियों का करना पड़ता है सामना

मीनल टिंगल

National Doctor’s Day 2021: डॉक्टर को यूं ही भगवान नहीं कहते. लोगों का विश्वास और उम्मीदें उनसे जुड़ी होती हैं. जितना विश्वास और उम्मीद लोग ईश्वर में रखते हैं उतनी ही उनको डॉक्टर में भी नज़र आती है. लेकिन भगवान के रूप में लोगों के विश्वास और उम्मीद पर खरा उतरने की भरपूर कोशिश में, डॉक्टर को अपनी ड्यूटी के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्या आप जानते हैं? आइये आज डॉक्टर वेद प्रकाश के ज़रिये जानते हैं कि अपनी ड्यूटी को निभाते हुए पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में वो किन चुनौतियों को फेस करते हैं. आपको बता दें कि डॉक्टर वेद प्रकाश किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट हैं.

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अपनों से पहले करनी होती है मरीज़ों की सेवा

डॉक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती है अपनों से पहले मरीज़ों की सेवा करने की. ये कहना है डॉक्टर वेद प्रकाश का. वो कहते हैं पर्सनल लाइफ में घूमना-फिरना, शादी-पार्टी तो दूर की बात है. हमारे ऊपर अपनों के बीमार होने पर भी उनसे पहले मरीज़ों का इलाज करने की ज़िम्मेदारी होती है. जबकि मेडिकल फील्ड में होने की वजह से हमारी फैमली की उम्मीद भी सिर्फ हमसे ही होती है और हम उनकी इस उम्मीद पर खरे नहीं उतर पाते हैं. क्योंकि हम वसुधैव कुटुम्बकम् में विश्वास करते हैं.

दुश्मन का भी करते हैं जी-जान से इलाज

डॉक्टर वेद प्रकाश कहते हैं कि मैं बताना चाहूंगा पिछले दिनों मेरी पत्नी कोविड पॉज़िटिव थीं. मेरे डॉक्टर होने की वजह से और घर में कोई और मेल मेंबर न होने की वजह से उनकी बहुत सारी उम्मीदें मुझसे थीं लेकिन मुझे उनकी केयर से पहले मरीज़ों के लिए अपनी ड्यूटी निभानी थी. क्योंकि हम मेडिकल से जुड़े लोग यही ओथ लेते हैं कि सबसे पहले हमारी ज़िम्मेदारी मरीज़ों के लिए होगी.  जिसको निभाने के लिए हमें हमारे परिवार के लोगों को भी तकलीफ में छोड़ कर मरीज़ों की सेवा करने जाना होता है. फिर चाहें सामने हमारा दुश्मन ही क्यों न हो.

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सब कुछ नहीं होता हमारे हाथ में

डॉक्टर वेद प्रकाश कहते हैं. एक जो और भी बड़ी चुनौती हम डॉक्टर्स फेस करते हैं. वो है मरीजों और उनके तीमारदारों की उम्मीदों पर खरा उतरना. वो डॉक्टर को भगवान मानते हैं और उनको लगता है कि सब कुछ डॉक्टर के हाथ में है. जबकि हम भगवान नहीं हैं और सब कुछ हमारे हाथ में नहीं होता है. डॉक्टर, नर्स या मेडिकल से जुड़ा कोई भी व्यक्ति मरीज़ को ठीक करने के लिए हर संभव कोशिश करता है. लेकिन कई बार हज़ार कोशिशों के बावजूद हम सामने वाले की उम्मीद पर खरे नहीं उतर पाते हैं क्योंकि सब कुछ हमारे हाथ में नहीं होता है. ऐसे में जब कभी कोई नाराज़ होता है तो बहुत दुख होता है.क्योंकि हमें लगता है कि इतनी कोशिश के बावजूद हम सामने वाले की उम्मीद पर खरे नहीं उतर सके. लेकिन उनका गुस्सा भी हमें स्वीकार होता है क्योंकि वो दुख में होते हैं. पर थोड़ा सा उन लोगों को भी ये समझना चाहिए कि उनके ऐसे व्यवहार से हम डॉक्टर्स और मेडिकल फील्ड से जुड़े लोग भी आहत होते हैं.

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