कुछ बर्थमार्क (Birthmark) स्थाई होते हैं जो समय के साथ आकार या साइज में बड़े हो सकते हैं, जबकि कुछ अस्थाई होते हैं और समय के साथ पूरी तरह से हट जाते हैं.
स्वास्थ्य

जानें कितने तरह के होते हैं बर्थमार्क, कब दिखाएं डॉक्टर को

कुछ बर्थमार्क (Birthmark) स्थाई होते हैं जो समय के साथ आकार या साइज में बड़े हो सकते हैं, जबकि कुछ अस्थाई होते हैं और समय के साथ पूरी तरह से हट जाते हैं.

कुछ बर्थमार्क (Birthmark) स्थाई होते हैं जो समय के साथ आकार या साइज में बड़े हो सकते हैं, जबकि कुछ अस्थाई होते हैं और समय के साथ पूरी तरह से हट जाते हैं.



  • Last Updated:
    October 27, 2020, 11:14 AM IST

बर्थमार्क (Birthmark) त्वचा पर मौजूद एक धब्बा या निशान होता है, जो या तो जन्म के समय से ही शिशु के शरीर पर होता है या फिर जन्म के कुछ दिनों के अंदर उभर जाता है. करीब 80 प्रतिशत नवजात शिशु (Infant) बर्थमार्क के साथ पैदा होते हैं. यह निशान शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं. हर शिशु में बर्थमार्क का रंग-रूप, आकृति, आकार अलग-अलग तरह का होता है. myUpchar से जुड़े डॉ. प्रदीप जैन का कहना है कि कुछ बर्थमार्क स्थाई होते हैं जो समय के साथ आकार या साइज में बड़े हो सकते हैं, जबकि कुछ अस्थाई होते हैं और समय के साथ पूरी तरह से हट जाते हैं. शिशु के शरीर पर बर्थमार्क क्यों बनता है, इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं है. कई शिशुओं में बर्थमार्क माता-पिता से वंशागुनत तौर पर आते हैं लेकिन यह कम मामलों में होता है. यूं तो ज्यादातर बर्थ मार्क पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं लेकिन कुछ बर्थ मार्क किसी बीमारी का संकेत हो सकते हैं.

डॉक्टर को कब दिखाएं

यह बात ध्यान देने योग्य है कि जब बर्थ मार्क बच्चे के शरीर पर असामान्य रूप से बढ़ते हैं तो यह स्पष्ट संकेत है कि उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने की आवश्यकता है. त्वचा पर बढ़ने वाली ऐसी कोई भी चीज जिसके कारण असुविधा हो रही है, उसे तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है. डॉक्टर आगे चलकर दवाओं, क्रीम, टेस्ट्स और यहां तक कि विभिन्न मामलों में लेजर की सलाह भी दे सकते हैं.दो प्रकार के होते हैं बर्थमार्क

बर्थमार्क मोटे तौर पर दो तरह के होते हैं वस्कुलर यानी नाड़ी संबंधी और पिग्मेंटेड बर्थमार्क. नाड़ी संबंधी बर्थ मार्क तब बनते हैं जब रक्त धमनिया सही तरीके से नहीं बनती हैं. ये सामान्य से ज्यादा चौड़ी होती हैं और इसकी संख्या भी ज्यादा हो सकती है. पिग्मेंटेड बर्थ मार्क तब बनते हैं जब कोशिकाएं ज्यादा विकसित हो जाती हैं. इसकी वजह से त्वचा में पिगमेंटेशन हो जाता है.

वस्कुलर बर्थमार्क तीन तरह के होते हैं. पहला मैकुसर स्टेन्स है जो कि देखने में काफी हल्के लाल रंग के होते हैं और आमतौर पर ललाट, पलकों, गर्दन के पीछे, नाक, होंठ या सिर के पीछे हो सकते हैं. ज्यादातर निशान शिशु के एक या दो साल के होने पर अपने आप खत्म हो जाते हैं तो कुछ में वयस्क होने तक रहते हैं. पोर्ट वाइन स्टेन्स प्रकार के वेस्कुलर बर्थ मार्क चेहरे, गर्दन, बाजू या पैरों में होते हैं और बच्चे के बड़े होने पर यह निशान भी बड़ा होता है. रंग वाइन के रंग की तरह होता है. अगर इसका इलाज न किया जाए तो वयस्क होने पर इसे छूने में कंकड़ की तरह लगता है. आंखों के आसपास अगर ऐसा बर्थमार्क हो तो देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. हेमेनजियोमा तीसरे प्रकार का वेस्कुलर बर्कमार्क हैं. myUpchar के अनुसार यह अक्सर शिशु के सिर, गर्दन या धड़ पर देखे जाते हैं. इनका रंग आमतौर पर लाल या नीले रंग का हो सकता है. यह ज्यादातर मामलों में खुद ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में शिशु के देखने, सुनने या खाने आदि में परेशानी पैदा करने लग जाते हैं और इनका इलाज जरूरी हो जाता है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, बच्चों में बर्थमार्क: जानें जन्म चिन्ह के बारे में सबकुछ पढ़ें.न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *