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क्या है लॉंग कोविड, इसके जोखिम और असर?

लंदन में हुई एक स्टडी (Scientific Study) में देखा गया कि कोविड 19 के हर 20 पीड़ितों में से औसतन एक कम से कम आठ हफ्तों तक बीमार रहा और है. उम्रदराज़ लोगों, महिलाओं और संक्रमण के पहले हफ्ते में जिन लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण (Corona Virus Transmission) के पांच से ज़्यादा देखे गए थे, नए विश्लेषण (Covid-19 Analysis) में देखा गया कि उनमें ‘लॉंग कोविड’ डेवलप होने की आशंका ज़्यादा रहती है. स्टडी में यह भी कहा गया ​है कि यूके में लाखों और दुनिया भर में मिलियनों मामलों में इस ‘लॉंग कोविड’ से ग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है.

भारत में भी आप देख और सुन चुके हैं कि कोविड 19 से ग्रस्त कुछ मरीज़ों को कई हफ्तों तक लक्षण बने रहने की खबरें आ चुकी हैं. हालांकि कोविड से रिकवरी की दर भारत में बहुत बेहतर है, लेकिन लॉंग कोविड के खतरे से यहां भी इनकार नहीं किया जा रहा है. रविवार को ही कुछ हफ्तों पहले कोविड पॉज़िटिव पाए गए तमिलनाडु के एक मंत्री की मौत होने की खबर आई. लॉंग कोविड, इसके कारणों व नतीजों के बारे में जानना चाहिए.

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क्या है लॉंग कोविड?कोविड स्टडी एप के 4000 से ज़्यादा यूज़रों से मिले डेटा के आधार पर लंदन में की गई स्टडी में लॉंग कोविड को लेकर काफी विश्लेषण किया गया है. इसका मतलब यही है कि कोविड 19 से रिकवर हो जाने के बाद भी कोरोना वायरस के प्रभाव से बीमारी बनी रहती है. जिन लोगों में लॉंग कोविड की शिकायत देखी गई, उनमें कोरोना रिपोर्ट के पॉज़िटिव आने पर भी दो खास ढंग के लक्षण दिखाई देते हैं.

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पहला तो सांस तंत्र की शिकायतों से जुड़ा हुआ है यानी थकान, सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी से जुड़े लक्षण और दूसरे ढंग के लक्षणों में हृदय, आंत या ब्रेन जैसे कई अंगों पर पड़ने वाले असर को समझा जा रहा है. स्टडी के मुताबिक लॉंग कोविड के मरीज़ ज़्यादातर दिल से जुड़ी शिकायतें कर रहे हैं या ब्रेन फॉग संबंधी.

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रिसर्चरों के मुताबिक कहा गया है कि ज़्यादातर कोविड मरीज़ 11 या उससे कम दिनों में ठीक हो रहे हैं. लेकिन हर 7 मरीज़ों में से एक को कम से कम चार हफ्तों का समय ठीक होने में लग रहा है यानी इतने समय तक लक्षण बने रहते हैं. 20 में से एक मरीज़ आठ हफ्ते तक रिकवरी टाइम ले रहा है तो 50 में से एक को उससे भी ज़्यादा वक्त लग रहा है.

किसे है लॉंग कोविड का खतरा?
18 से 49 साल तक कोविड 19 मरीज़ों में करीब 10% लोगों को लॉंग कोविड होता पाया जा रहा है तो 70 साल से ज़्यादा की उम्र के मरीज़ों में इसकी दर 22% है. वज़न ज़्यादा होना भी लॉंग कोविड के एक खतरे के तौर पर देखा गया है. रिसर्चरों ने देखा कि युवावस्था की महिलाओं को पुरुषों की तुलना में लॉंग कोविड का जोखिम 50% ज़्यादा है. इसके साथ ही, अस्थमा मरीज़ों में खतरा ज़्यादा देखा गया.

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दुनिया भर में हज़ारों लाखों लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर कोविड 19 के लक्षणों के लगातार बने रहने को लेकर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. कुछ लोग इसे ‘लॉंग हॉलर्स’ कह रहे हैं और कुछ लोग ‘लॉंग कोविड’.

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कन्फ्यूज़न और सवाल हैं बरकरार
कोविड 19 के लक्षणों के बने रहने की इस समस्या को लेकर स्वास्थ्य सेक्टर बेहाल है. ‘लिविंग विद कोविड’ शीर्षक से रिसर्च रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाली वैज्ञानिक की मानें तो लॉंग कोविड के कारणों और असर को जानने के लिए अभी और रिसर्चों की ज़रूरत है और इसमें मरीज़ों व डॉक्टरों को डेटा मेंटेन करना होगा ताकि स्टडीज़ इस दिशा में किसी निष्कर्ष तक पहुंच सकें.

शुरूआती रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने माना है कि लॉंग कोविड बीमारी का एक चक्र हो सकता है. लक्षण शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर रहे हैं और केस के हिसाब से इनकी गंभीरता भी अलग अलग है. इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस बात के कई तथ्य मिल चुके हैं कि कोविड 19 के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाव लंबे समय तक दिखते रहेंगे.



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