क्या है खाने से जुड़ी 'फीलिंग ऑफ फुलनेस', कैसे बनी रहेगी एनर्जी? एक्सपर्ट ने बताया
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क्या है खाने से जुड़ी ‘फीलिंग ऑफ फुलनेस’, कैसे बनी रहेगी एनर्जी? एक्सपर्ट ने बताया

कभी-कभी ऐसा होता है कि खाते समय ये बिल्कुल पता नहीं होता कि हमें कब रुकना है. ऐसे में हम जमकर खाते हैं. नतीजा ये होता है कि हम बाकी समय सुस्त और आलस से भरा हुआ महसूस करने लगते हैं. वहीं, कई बार ऐसा होता है कि हम बहुत कम खाना लेते हैं और हमें पूरे दिन चलने के लिए एनर्जी की कमी महसूस होती है. भूख के बारे में जागरूकता या इसकी कमी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये आखिरकार आपके हेल्दी डाइजेशन का रिफ्लेक्शन (प्रतिबिंब) है. न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल (Nutritionist Nmami Agarwal ) ने एक बहुत ही ज़रूरी शब्द का अर्थ समझाने के लिए इंस्टाग्राम का सहारा लिया. ये शब्द है, ‘फीलिंग ऑफ फुलनेस (Feeling of Fullness) यानी पूर्णता/तृप्ति की भावना’.

उन्होंने कैप्शन में लिखा, “ये जानना बहुत ज़रूरी है कि खाना खाते समय या अपने फेवरेट फूड को इंजॉय करते समय कब रुकना है, लेकिन हममें से ज्यादातर लोग अपनी ‘फीलिंग ऑफ फुलनेस’ के बारे में नहीं जानते हैं. यही कारण होता है कि हम या तो बहुत कम या बहुत ज्यादा खा लेते हैं.”

न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल ने आगे बताया, “पेट और दिमाग दोनों द्वारा संतुष्टि की भावना तक पहुंचने से आपको अच्छा महसूस करने और संतृप्ति (satiety) तक पहुंचने में मदद मिलेगी.”

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अपनी पोस्ट के साथ शेयर किए वीडियो में न्यूट्रीशनिस्ट ने बताया कि एनर्जी के अलावा, हमारा भोजन हमें विटामिन, मिनरलल्स और अन्य न्यूट्रीएंट्स भी प्रदान करता है. हम फीलिंग ऑफ फुलनेस के बारे में नहीं जानते हैं और इसलिए या तो बहुत अधिक खाना खा लेते हैं, या बहुत कम.

क्या है फीलिंग ऑफ फुलनेस
न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल ने कहा कि फीलिंग ऑफ फुलनेस (परिपूर्णता) ही फीलिंग ऑफ सटाइटी  (satiety) यानी तृप्ति की भावना है. मतलब एक ऐसी स्थिति, जिसमें आप खाने के बाद फुल एनर्जी के साथ काम कर सकते हैं. उन्होंने वीडियो में आगे बताया कि हमने कई बार देखा होगा कि जब हम ज्यादा खा लेते हैं, तो हमें सुस्ती आती है. हम आलस्य महसूस करते हैं. किसी भी काम को करने की हमारे में एनर्जी नहीं रहती है, इसलिए अपनी डाइट को कुछ इस तरह से लें कि आपमें काम करने की एनर्जी बनी रहे.

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उन्होंने आगे बताया, ‘जब हम अपने खाने को 80 से 90 प्रतिशत तक खाते हैं तो, हमारा डाइजेशन ठीक से काम करता है. हम सुस्त नहीं फील करते और हमारे शरीर में दिन के काम करने के लिए एनर्जी बनी रहती है.’

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