क्या है इमोशनल बिंज ईटिंग और किस तरह दूर करें खाने की ये समस्या – News18 हिंदी
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क्या है इमोशनल बिंज ईटिंग और किस तरह दूर करें खाने की ये समस्या – News18 हिंदी

What is Emotional Binge Eating: क्या आप जानते हैं कि आप जो कुछ भी खाते हैं, उससे आपका मूड प्रभावित होता है. जब लोग अधिक खुश होते हैं, तो अच्छा खाते हैं, वहीं जब उदास, शांत या स्ट्रेस में होते हैं, तो कुछ भी खाने लगते हैं फिर चाहे वो हेल्दी चीजें हों या अनहेल्दी. जैसे-जैसे व्यक्ति का मूड और भावनाएं बदलती हैं, खानपान भी वैसा ही हो जाता है. क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट अंशुल जयभारत कहती हैं कि इमोशनल बिंज ईटिंग (Emotional Binge Eating) को ज्यादातर अवसाद (Depression), एंग्जायटी, लो फीलिंग, स्ट्रेस, उदासी के साथ जोड़कर देखा जाता है. इमोशन में बहुत खुश और बहुत दुखी होना दोनों ही शामिल होते हैं. जब हम बहुत खुश होते हैं, तो सेलिब्रेशन मोड में होने के कारण बहुत अधिक खाते हैं. जब आप लो फील करते हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, जिसे कॉर्टिसोल कहते हैं. स्ट्रेस शरीर के लिए अच्छा नहीं होता है. ऐसी स्थिति में हमारा दिमाग डिटेक्ट करता है कि यदि स्ट्रेस का लेवल शरीर में बढ़ रहा है, तो उसे कम करना जरूरी है. इसके लिए दिमाग हमारे मन को उकसाता है कि हम पसंदीदा फूड या आराम पहुंचाने वाले फूड्स का सेवन करें. ऐसे फूड दो कैटेगरी में आते हैं, हाई शुगर और हाई फैट. इन दोनों ही तरह के फूड्स के अंतर्गत मीठी चीजें, जंक फूड, प्रॉसेस्ड फूड, चिप्स, कुकीज, कोक जैसी नुकसानदायक चीजें आती हैं, जिनका अधिक सेवन शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है. बिंज ईटिंग में कई बार लोग इतना खाते हैं कि वजन भी बढ़ जाता है. साथ ही कई रोगों के बढ़ने का भी कारण होता है.

किन्हें होती है इमोशनल बिंज ईटिंग की समस्या

ऐसा नहीं कि सिर्फ पुरुष ही बिंज ईटिंग करते हैं. महिलाएं भी इसका शिकार होती हैं. कुछ लोग इमोशनल ईटिंग को भूख समझ बैठते हैं और इस चक्कर में बहुत अधिक खाने लगते हैं. स्ट्रेस के कारण शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है.

इमोशनल बिंज ईटिंग से बचने के उपाय

  • यदि आप बिंज ईटिंग के शिकार हो गए हैं, तो इससे छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन मेडिटेशन करें. मेडिटेशन करने से आपका स्ट्रेस और एंग्जायटी लेवल कम होगा, साथ ही आपके फूड च्वाइस में भी सुधार होगा. आप सोच-समझकर खाने-पीने की चीजों का चुनाव करेंगे.

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  • जब आप उदास, स्ट्रेसफुल, चिंतित, एंग्जायटी में रहते हैं, तो कोशिश करें कुछ देर प्रकृति के करीब समय बिताने का, सूरज की रोशनी में बैठने का, नंगे पैर घास पर चलने का. हरियाली के बीच समय बिताने से मूड फ्रेश होता है. फील गुड हार्मोन का स्राव होता है, जिससे आप अच्छा महसूस करते हैं. इससे खानपान, फूड्स की तरफ से आपका ध्यान भी हटेंगा और आप रिलैक्स भी महसूस करेंगे.
  • एक्सरसाइज करने से कई शारीरिक और मानसिक समस्याएं दूर होती हैं. इसके जरिए हेल्दी ईटिंग हैबिट्स को अपनाने में भी मदद मिलती है. एक्सरसाइज करने से डिप्रेशन, स्ट्रेस, एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याओं को दूर किया जा सकता है. आप घर पर ही 15-20 मिनट योग करें, चाहें तो बाहर टहलने जाएं. जॉगिंग करें. इस तरह से आप काफी हद तक इमोशनल ईटिंग से बचे रह सकते हैं.
  • खानपान में उन फूड्स को शामिल करें जिसमें फाइबर और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है. फाइबर पेट को देर तक भरा रखते हैं, जिससे आपको कम भूख लगती है और आप कुछ भी अधिक खाने से बचे रहते हैं.

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  • यदि इन तमाम तरीकों को अपनाकर भी इमोशनल बिंज ईटिंग की समस्या से पीछा नहीं छूट रहा है, तो फिर किसी हेल्थ एक्सपर्ट की जरूर मदद लें.
  • उन फूड्स का अधिक सेवन कर सकते हैं, जो हैप्पी हार्मोन को शरीर में रिलीज करते हैं. स्ट्रेस, एंग्जायटी बढ़ाने वाले फूड्स के सेवन से बचें. स्ट्रेस हार्मोन का निर्माण जितना शरीर में कम होगा, आपको उतना ही अच्छा महसूस होगा. हैप्पी हार्मोन शरीर में रिलीज होगा, तो आप अंदर से फील गुड, खुशी महसूस करेंगे, जिससे डाइट भी अच्छा लेंगे.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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