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स्वास्थ्य

कोविड वैक्सीन की तर्ज पर वैज्ञानिकों ने शुरू किया प्लेग की वैक्सीन का ट्रायल UK scientists have started the first trial of a new plague vaccine– News18 Hindi

Vaccine For Plague: सदियों पुरानी बीमारी प्लेग के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने टीका विकसित कर लिया है. इसके लिए पहले चरण का ट्रायल शुरू हो गया है. इस ट्रायल में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में रिसर्च कर रहीं 26 साल की लैरिसा (Larissa) को भी टीका लगाया गया है. पहले चरण में 18 से 55 साल के 40 स्वस्थ्य व्यक्तियों को टीका लगाया गया है. इस टीके का निर्माण उसी तकनीक पर किया गया है जिस तकनीक पर कोविड वैक्सीन का विकास हुआ है. प्लेग की बीमारी दुखद इतिहास को बयां करती है. 13वीं सदी में प्लेग के कारण यूरोप में आधी आबादी की मौत हो गई थी. आज भी यह बीमारी अफ्रीका, एशिया और अमेरिका में लोगों को लग जाती है. 2017 में प्लेग के कारण मेडागास्कर में 171 लोगों की मौत हो गई थी. यही कारण है कि प्लेग का टीका बनाना जरूरी था.

साइड इफेक्ट और बीमारी से लड़ने की क्षमता को परखा जाएगा
प्लेग बीमारी हो जाने पर शुरुआती दौर में यदि मरीज को एंटीबायोटिक्स (Antibiotics ) दिया जाए तो यह सही हो सकती है लेकिन सुदूर गांवों में जानकारी के अभाव में ऐसा संभव नहीं हो पाता है. बाद में यह बीमारी लाइलाज बन जाती है. वैक्सीन से कई जानों को बचाया जा सकता है. पहले चरण के ट्रायल में यह देखा जाएगा कि वैक्सीन लेने के बाद शरीर प्लेग के खिलाफ किस तरह का व्यवहार करता है. ट्रायल के दौरान वैक्सीन के साइड इफेक्ट और बीमारी से लड़ने के लिए बनने वाली एंटीबॉडी कितनी असरदार है, इसे भी समझा जाएगा. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (University of Oxford) पर जेनेटिक्स में अध्ययन कर रही लैरिसा (Larissa) बताती हैं कि वह भाग्यशाली हैं कि उनके जीवन में टीके का निर्माण हुआ. उन्होंने कहा, ‘जब मुझे पता लगा कि दो हजार साल पुरानी बीमारी पर अध्ययन हो रहा है और इसके खिलाफ वैक्सीन तैयार की जा रही है तो मुझे इसका हिस्सा बनने में कोई संकोच नहीं हुआ.’ जब उनसे पूछा गया कि क्या आपको साइड इफेक्ट का डर नहीं है तो लैरिसा ने कहा, ‘मैं इसकी चिंता नहीं करती.’

क्या है प्लेग और कैसे यह फैलता है?
येर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया के संक्रमण से प्लेग की बीमारी होती है. इस बीमारी का वाहक चूहा है.  बैक्टीरिया से संक्रमित चूहे के काटने पर यह संक्रमण फैलता है. प्लेग का संक्रमण होने पर तेज बुखार, लिम्फ नोड में सूजन, सांस लेने में तकलीफ होती है. कुछ मामलों में खांसी के दौरान मुंह से खून आने के शिकायत भी होती है. इलाज न होने पर मरीज की मौत हो जाती है. संक्रमित चूहे के काटने के अलावा, संक्रमित जानवर के आसपास रहना या फिर इन्हें उठाने पर संक्रमण फैल सकता है. संक्रमित इंसान के लार के सम्पर्क में आने पर दूसरे स्वस्थ इंसान में भी इसका संक्रमण फैल सकता है.

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