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कोरोना से ही नहीं घटती सूंघने की क्षमता, इन बीमारियों का भी हो सकता है संकेत/ Decreased sense to smell is not only related to corona nav– News18 Hindi

Decreased ability to smell : कोरोना वायरस के लक्षणों में स्वाद (Taste) का पता न चलना और सूंघने की क्षमता (Sense of Smell) का कम होना अहम माना जाता है. जानकारों का कहना है कि बुखार या गले में दर्द के साथ साथ अगर स्वाद का पता न लगना और सूंघने की क्षमता में कमी आती है तो कोरोना की जांच करवाना अनिवार्य हो जाता है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इसका संबंध केवल कोरोना वायरस संक्रमण से ही नहीं है, बल्कि ये कई अन्य बीमारियों का संकेत भी हो सकता है.

एनबीटी की रिपोर्ट में फोर्टिस अस्पताल (Fortis Hospital) में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ मनोज शर्मा ने बताया है कि सूंघने की क्षमता में कमी केवल कोरोना ही नहीं, बल्कि किसी अन्य बीमारी की तरफ भी इशारा करती है.

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डॉ शर्मा ने अमेरिकन कॉलेज ऑफ फीजिशियंस का हवाला देते हुए बताया कि जिन बुजुर्गों में सूंघने की क्षमता कम पाई गई उनमें अगले 10 साल में मृत्यु का खतरा 50 प्रतिशत तक अधिक देखा गया. हालांकि ऐसा भी देखने में आया है कि कई बार सामान्य जुकाम में भी यह क्षमता घटती है. लेकिन अगर इसके अलावा सूंघने की क्षमता घटती है तो सावधान रहने की जरूरत है.

कैसे होता है सूंघने का टेस्ट
डॉ शर्मा के मुताबिक सूंघने की क्षमता वाले टेस्ट को बुकलेट टेस्ट कहते है. इसमें कई पन्नों की एक बुकलेट होती है, जिसमें विशेष गंध से भरे छोटे-छोटे बुलबुले होते हैं. पीड़ित को कहा जाता है कि वो हर पन्ने को कुरेदे और गंध को पहचाने.

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अगर वो गंध को सूंघ नहीं सकते हैं, या फिर उसे पहचानने में गलती करते हैं, तो यह गंध पहचानने की घटती क्षमता का संकेत माना जाता है. उन्होंने बताया कि किसी ईएनटी स्पेशलिस्ट की निगरानी में यह टेस्ट करना चाहिए.

महिलाओं में सूंघने की क्षमता अधिक
रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में सूंघने की क्षमता अधिक होती है. यही नहीं, गर्भवती महिलाओं में तो यह क्षमता और अधिक हो जाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक सूंघने की घटती क्षमता अल्जाइमर (Alzheimer’s), सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) अथवा ऑटोइम्यून (Autoimmune) बीमारी का संकेत हो सकता है. ये डिसऑर्डर माइंड के उस हिस्से को सिकु़ड़ा देते हैं या प्रभावित कर देते हैं जो सूंघने के लिए काम करता है.

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डॉ मनोज के मुताबिक पार्किंसन फाउंडेशन के अनुसार इस बीमारी से पीड़ित अधिकांश लोगों की सूंघने की क्षमता घट जाती है. इसे हाईपोस्मिया (Hyposmia) कहा जाता है. ऐसे में यह गंभीर खतरा हो सकता है.

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