कोरोना वैक्सीन विकास में बहुत अहम होंगे हॉर्सशू क्रैब, क्यों और कैसे?
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कोरोना वैक्सीन विकास में बहुत अहम होंगे हॉर्सशू क्रैब, क्यों और कैसे? | international-studies – News in Hindi

कोविड 19 महामारी से जूझ रही दुनिया जिस वैक्सीन (Anti Covid Vaccine) के लिए इंतज़ार कर रही है, उस वैक्सीन का विकास एक ऐसे जीव से होगा जो मनुष्यों से करोड़ों साल पहले से पृथ्वी पर मौजूद रहा है. हॉर्सशू क्रैब के इम्यून टेस्ट (Immune Test) के बाद वैज्ञानिकों को यह देखकर खासी हैरत हुई कि ज़्यादातर प्रजातियों (Species) की तुलना में सबसे लंबा जीवन जीने वाला यह जीव अपनी इम्युनिटी (Immunity) की वजह से ही इतना खास है. अब ये दावा है कि वैक्सीन में हॉर्सशू क्रैब की खास भूमिका होने वाली है.

हेल्थकेयर के लिए चमत्कार से कम नहीं है हॉर्सशू क्रैब!
अटलांटिक क्षेत्र में मत्स्य पालन कमीशन से जुड़े एलन बर्जेंसन के शब्दों में दुनिया भर के स्वास्थ्य क्षेत्र को हॉर्सशू क्रैब का धन्यवाद करना चाहिए. ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि 1970 के दशक से ही हॉर्सशू क्रैब के खून को लिम्यूलस एमेबोसाइट लीज़ेट यानी LAL टेस्ट के लिए अप्रूव किया था. बुखार और कुछ मामलों में मौत का कारण बनने वाले एक बैक्टीरिया को पहचानने के लिए यह टेस्ट अहम रहा है.

ये भी पढ़ें :- अंडा बेहतर या दूध? मप्र सरकार के कदम से क्यों शुरू हुई ये बहस?इस टेस्ट का फायदा क्या है? इस बारे में अमेरिका में लाइसेंसधारी एक दवा निर्माता कंपनी के प्रमुख जॉन डबज़ैक के हवाले से यूएसए टुडे की रिपोर्ट की मानें तो फार्मा कंपनियां जो दवाएं और मेडिकल उपकरण बनाती हैं और तमाम वैक्सीन भी, उनकी क्वालिटी और सुरक्षा बढ़ाने के लिहाज़ से यह टेस्ट बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ है. इस टेस्ट का नाम भी इसी हॉर्सशू क्रैब पर है, जिसका वैज्ञानिक नाम लिम्यूलस पॉलीफेमस है.

हॉर्सशू क्रैब की इम्युनिटी बेहद गजब की पाई गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कैसे हॉर्सशू क्रैब होगा वैक्सीन के लिए अहम?
दुनिया भर में कोरोना वायरस के 3.15 करोड़ कुल केस और 9.67 लाख मौतों के बाद विशेषज्ञों का दावा है कि दुनिया में वैक्सीन की रेस में चाहे जो वैक्सीन आगे निकले, लेकिन LAL ही किसी भी वैक्सीन के लिए स्टैंडर्ड टेस्ट होगा, जो वैक्सीन के सुरक्षित होने की जांच करेगा. LAL टेस्ट के लिए अमेरिका में चार प्रोडक्शन यूनिटें दक्षिण कैरोलिना, मैसेचुसेट्स, मैरीलैंड और वर्जीनिया में हैं.

हॉर्सशू क्रैब परामर्श पैनल के प्रमुख बर्जेंसन के मुताबिक 5 अरब कोविड वैक्सीन डोज़ परेशानी की वजह नहीं होंगे. उनका मानना है कि वैक्सीन की सुरक्षा को जांचने के लिए जिस मटेरियल की ज़रूरत होगी, वो तीन दिन के भीतर प्रोडक्शन से ही मिल जाएगा. और यह खास मदद वह जीव करेगा, जिसे हमेशा हमने गलत ही समझा. फार्मा उद्योग में माइक्रो बायोलॉजिस्ट के तौर पर 40 साल का अनुभव रखने वाले बर्जेंसन के मुताबिक इस जीव का ज़रूरत से ज़्यादा शिकार किया गया है.

हॉर्सशू क्रैब के बारे में गलत धारणाएं
डायनासॉर से भी पहले से पृथ्वी पर अपनी मौजूदगी रखने वाला यह क्रैब यानी अश्वनाल केकड़ा मनुष्यों के पृथ्वी पर आने से 40 करोड़ साल पहले से है. और विडंबना यह है कि अब इसके ​अस्तित्व के लिए मनुष्य ही सबसे बड़ा खतरा है. इस तरह की खबरें खूब चर्चित हुई थीं कि 11 लाख रुपये लीटर तक बिकने वाला इस जीव का नीला खून मेडिकल साइन्स में अमृत की हैसियत रखता है. लेकिन इस जीव को ठीक से पहचाना ही नहीं गया. यहां तक कि इसका नाम तक सही नहीं समझा गया.

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सच में क्या है हॉर्सशू क्रैब?
दक्षिण कै​रोलिना के मरीन साइंटिस्ट डेनियल सैसन की मानें तो हॉर्सशू क्रैब वास्तव में केकड़े नहीं नहीं बल्कि मकड़े प्रजाति के ज़्यादा करीब हैं. मकड़ों की तरह की इनके पैर और आंखें ज़्यादा होती हैं और इनके चिमटीनुमा नख भी. हालांकि ये क्रैब से मेल नहीं खाते, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता. दूसरे, ये डरावने भले दिखते हों लेकिन न तो ये ज़हरीले और न ही आक्रामक.

10 पाउंड तक का वज़न रखने वाले ये क्रैब मनुष्यों के लिए बहुत उपयोगी हैं. इस क्रैब की बाहरी कवचनुमा चीज़ इतनी सख्त होती है कि इस पर ज्वालामुखी तक का भी असर नहीं पड़ता. और इसका नीला खून बहुत कीमती है क्योंकि यहीं चंद सेकंडों में वो कोशिकाएं बनती हैं, जो सुरक्षा के लिहाज़ से तकरीबन जादुई हैं.



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