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कोरोना महामारी ने Jobs के साथ-साथ मेंटल हेल्थ को भी पहुंचाई चोट / Corona epidemic hurt mental health along with jobs– News18 Hindi

Job Crisis in Corona Period :  पूरी दुनिया को झकझोर देने वाली कोरोना महामारी (Corona Epidemic) से हर कोई त्रस्त है. आर्थिक जगत से लेकर सामान्य जनजीवन तक ट्रैक से उतर गया है. क्या बिजनेसमैन और क्या नौकरीपेशा हर कोई परेशान है. लोग किसी ना किसी तरह इस संकट से उबरने में जुटे हैं. लेकिन इस सच्चाई को भी नकारा नहीं जा सकता है कि इस संकट ने बहुत से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीर चोट पहुंचाई है, खास तौर से युवा वर्ग को. जो कि पढ़ाई खत्म करके नौकरी की तलाश में या फिर वो लोग जिन्हें महामारी के चलते अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा.

अमर उजाला अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन हेल्थ फाउंडेशन द्वारा किए सर्वे में पता चला है कि 22 से 26 वर्ष के (86 फीसदी) युवा मानते हैं कि कोरोना महामारी के कारण नौकरी और मानसिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

संपर्क न बनने से बड़ा संकट
सर्वे के मुताबिक युवाओं का कहना है कि महामारी और लॉकडाउन के कारण अपने स्किल्स और एजुकेशन के दम पर लाइफ जो वो चाहते थे वो हासिल नहीं कर सके हैं. यही नहीं 86 फीसदी युवा मानते हैं कि सही लोगों से संपर्क न बनने से भी उनका जीवन प्रभावित हुआ. वहीं 73 फीसदी युवाओं का मानना है कि जिनके पास अच्छे संपर्क थे, वो इस दौर में भी नौकरी पा गए.

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मानसिक समस्या ने किया परेशान
सर्वे में जो चौंकाने वाली बात सामने आई वो ये कि 5 में से 4 युवा यानि की 80 प्रतिशत युवा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या से परेशान रहे. वहीं 10 में 7 युवाओं (69 प्रतिशत) का कहना है कि महामारी से पहले की तुलना में अभी मानसिक स्वास्थ्य लाभ लेना अधिक कठिन है. उनका कहना है कि खराब हालात के बीच इलाज के लिए सोचना ही मुश्किल था.

नौकरी बचाने को लेकर टेंशन
दुनिया में महामारी के कारण अभी भी स्थिति नाजुक बनी हुई है. युवाओं का कहना है कि जिनके पास नौकरी है उसे बचाना मुश्किल हो गया है. 54 फीसदी का तो ये कहना है कि वे मजबूरी में अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी करने पर मजबूर है. 35 फीसदी का मानना है कि अगले 6 महीने में सुरक्षित और अच्छी नौकरी हासिल करना मुश्किल है.

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परिवार से मदद लेने में शर्मिंदगी
इस रिसर्च में शामिल युवाओं में से 76 प्रतिशत का कहना है कि उन्हें अपना खर्च चलाने के लिए पैरेंट्स से पैसा लेना पड़ रहा है. पढ़ाई पूरी होने के बाद महामारी में ये स्थिति हमारे लिए बहुत शर्मनाक है. युवाओं का मानना है कि महामारी के खत्म होने के बाद अच्छी नौकरी पाना भी बेहद मुश्किल होगा.

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