कोरोना के बाद हार्ट रेट बढ़ने को हल्के में न लें, एक्सपर्ट से जानें क्यों ध्यान देना है जरूरी
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कोरोना के बाद हार्ट रेट बढ़ने को हल्के में न लें, एक्सपर्ट से जानें क्यों ध्यान देना है जरूरी

Increase In Heart Rate After Covid : पिछले दो सालों से पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाली कोरोना महामारी का प्रकोप आज भी जारी है. हालांकि इन दो सालों के दौरान हमने मास्क पहनने, हाथों को बार-बार धोने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने को अपनी लाइफ का अहम हिस्सा बना लिया है. लकिन इन सबके बीच एक अहम सवाल ये भी है कि हम कोरोना के बाद की जटिलताओं (post-COVID complications) को कहां तक समझ पाएं हैं? ये सोचना गलत है कि एक बार जब COVID संक्रमण कम हो जाता है, तो हम कोरोनावायरस से बच गए और हमेशा के लिए सुरक्षित हो गए हैं. COVID शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है, और संक्रमण के बाद भी प्रभाव बना रहता है. सांस की ये बीमारी ठीक होने के बाद भी लोगों को लंग्स, हार्ट और पेट से जुड़ी तकलीफों से प्रभावित करती नजर आ रही है. मतलब कोरोना वायरस ने लक्षणों के साथ दीर्घकालिक रूप से शरीर के कई अंगों पर गंभीर असर डाला है. कई लोगों में ठीक होने के लंबे समय के बाद तक भी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं. आंकड़े बताते हैं कि कोविड-19 से ठीक होने वाले लोगों में हार्ट रोगों के मामले अधिक देखे जा रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी न्यूज रिपोर्ट में बेंगलुरू की नारायण हेल्थ सिटी में कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ प्रवीण पी सदरमिन (Dr Praveen P Sadarmin) कहते हैं, ‘ कोविड-19 को हार्ट के लिए बड़े संकट के तौर पर देखा जा रहा है. वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन (WHF)ने महामारी की शुरुआत में ही इसकी आशंका जताई थी कि कोविड-19 के कारण इंफ्लामेटरी दिक्कतें बढ़ सकती हैं, जिसके कारण लोगों को हार्ट में सूजन और इससे संबंधित कई तरह की अन्य समस्याएं हो सकती हैं. ये मायोकार्डिटिस (Myocarditis) या पेरिकार्डिटिस (Pericarditis) के रूप में प्रकट हो सकती है. यही कारण है कि जानकार कोविड से ठीक होने के बाद हार्ट की जांच करा लेने की सलाह देते हैं. ‘

COVID और दिल की धड़कन की दर
संक्रमण से ठीक हो चुके लोग हार्ट बीट में बढ़ोतरी की शिकायत लेकर आ रहे हैं. हार्ट की सामान्य गति 60 से 100 के बीच की होती है. वैसे तो कुछ कारणों के चलते इसमें कभी-कभार बढ़ोतरी आ सकती है, हालांकि संक्रमण से ठीक होने के बाद ज्यादातर लोगों में इस तरह की दिक्कत अक्सर बने रहने की समस्या देखी जा रही है. इसे मेडिकल की भाषा में टैकाकार्डिया (Tachycardia) के रूप में जाना जाता है. COVID में, कई रोगियों ने दिल से संबंधित कई समस्याओं की शिकायत की है जैसे कि ठीक होने के बाद भी तेज़ धड़कन का अनुभव करना, ये चिंता की बात है.

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टैकाकार्डिया के बारे में जानिए
टैकाकार्डिया (Tachycardia)वह स्थिति है जिसमें हार्ट रेट में बढ़ोतरी देखी जाती है; ये या तो हार्ट के निचले कक्षों में शुरू हो सकता है, जिसे निलय कहा जाता है या ऊपरी कक्षों में जिसे अटरिया (atria) कहा जाता है. जिन लोगों को कोरोना के हल्के-मध्यम स्तर का संक्रमण रह चुका है, ऐसे लोगों में भी हार्ट के बढ़ने की समस्या देखी जा रही है. सामान्य कार्यों के दौरान दिल की धड़कन 95-100 तक बढ़ जाती है. कई रोगियों में ये स्थिति कुछ समय के बाद ठीक हो जाती है, हालांकि कुछ में यह लंबे समय तक भी बनी रह सकती है. दिल की धड़कन का तेज बने रहना कई तरह की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है.

COVID के बाद बहुत से लोग हल्की गतिविधियों के साथ भी तेज़ दिल की धड़कन का अनुभव करते हैं.
कोरोना से ठीक होने के बाद बहुत से लोगों को थोड़ी सी भी एक्टिविटी या श्रम करने पर तेज हार्टबीट फील होती है.

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जो लोग कोरोना से पहले घंटों काम करने पर भी नहीं थकते थे, उनका थोड़े समय में ही सांस फूलने लगता है, हार्ट रेट बढ़ जाता है. ऐसे में कम दूरी तक चलने जैसी छोटी-छोटी शारीरिक गतिविधियां करने पर भी दिल की धड़कन 95-100 तक बढ़ जाती है. जबकि कई रोगियों में ये स्थिति कुछ समय के बाद ठीक हो जाती है, कई अन्य में ये कुछ समय के लिए बनी रहती है. इसके अलावा, दिल की धड़कन में उतार-चढ़ाव उन लोगों के लिए खतरनाक होता है जिनका दिल से जुड़ी बीमारियों का पिछला रिकॉर्ड होता है.

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स्टडी के नतीजे
द लैंसेट में प्रकाशित 2021 की एक स्टडी से पता चला है कि कोरोना से ठीक होने के बाद पहले सप्ताह में दिल का दौरा पड़ने का रिस्क तीन से आठ गुना बढ़ गया है. ये स्टडी 87 हजार लोगों पर की गई, जिनमें 57 फीसदी महिलाएं थीं. इसमें ये भी भी पाया गया कि बाद के हफ्तों में ब्लड क्लॉट और दिल के दौरे के जोखिम में लगातार कमी आई लेकिन कम से कम एक महीने तक ये हाई बना रहा.

Tags: Corona, Health, Health tips, Lifestyle

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