कई देशों में कोरोना संक्रमण की सेकंड वेव खतरनाक हो रही है.
स्वास्थ्य

कैसे भारत, अमेरिका और यूरोप फिर हैं चपेट में?

दुनिया भर में कोरोना की सेकंड वेव (Secone Wave of Corona) ने कहर ढाना शुरू कर दिया है. भारत समेत ज़्यादातर जगहों पर सितंबर तक पीक पर पहुंचे कोविड 19 (Covid-19 Peak) के आंकड़े नवंबर के महीने में एक बार फिर उछाल पर हैं. अमेरिका (Corona Virus in US) में तो कुल संक्रमणों की संख्या 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई और मौतों की संख्या ढाई लाख से ज़्यादा हो चुकी. सिर्फ एक दिन में एक लाख से ज़्यादा केस अमेरिका में फिर दर्ज किए गए. जबकि माना जा रहा था कि प्रतिदिन केसों की संख्या के मामले में भारत (Covid-19 in India) इस बार सबसे आगे रहेगा. इसके साथ ही, यूरोप में भी संक्रमण (Corona in Europe) को लेकर बेहद चिंताजनक माहौल है.

सर्दियों के मौसम में कोविड 19 की सेकंड वेव आएगी और कहर ढाएगी, यह भविष्यवाणी विशेषज्ञों ने पहले ही कर दी थी. इसके बावजूद कई देशों में हालात काफी गंभीर हो गए हैं. सबसे ज़्यादा केसों के मामले में अमेरिका, भारत और ब्राज़ील तीन टॉप देश हैं, जबकि टॉप 10 में बाकी देश यूरोप के हैं. आंकड़ों की ज़ुबानी समझिए कि कैसे यह सेकंड वेव दुनिया भर में दर्ज हो रही है.

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भारत में दिल्ली, केरल सबसे ज़्यादा चपेट मेंअगर 15 नवंबर तक यानी आधे महीने के आंकड़ों को देखा जाए तो दिल्ली में 98 हज़ार से ज़्यादा केस दर्ज हुए जो अक्टूबर के मुकाबले 25.5 फीसदी से ज़्यादा रहे. केरल में 91 हज़ार से ज़्यादा नए केस मिले जो अक्टूबर की तुलना में 21.2 फीसदी ज़्यादा रहे. महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर रहा, जहां अक्टूबर के मुकाबले बहुत अंतर ​नहीं दिखा और इस महीने 15 दिनों में करीब 69 हज़ार केस दर्ज हुए. इसके बाद पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में नए केस सबसे ज़्यादा दर्ज हुए.

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दिल्ली ने तोड़े पिछले रिकॉर्ड
एक दिन में 7000 से ज़्यादा नए केस और 100 से ज़्यादा मौतों के साथ दिल्ली ने रिकॉर्ड आंकड़े दर्ज किए. दिल्ली में तेज़ी से बढ़ रहे आंकड़ों ने फिर चिंता का माहौल बना दिया है और यहां तीसरी वेव गंभीर होती जा रही है. नवंबर में करीब एक लाख नए केसों तक पहुंच चुकी दिल्ली दुनिया के उन शहरों में शुमार हो चुका है, जहां कोविड केस सबसे तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

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अमेरिका में कोविड का एक और कहर
सर्दियों के मौसम में को​रोना के प्रकोप का आलम यह है कि अमेरिका में पिछले 24 घंटों में करीब 2000 मौतें दर्ज हुई हैं. मरीज़ों के लोड को लगातार झेलते हुए अस्पतालों का दम निकल रहा है. रोज़ नए केसों के मामले में अमेरिका अव्वल बना हुआ है और 1 लाख से ज़्यादा केस रोज़ फिर देखे जा रहे हैं. बुधवार को ही 1,55,000 नए केस दर्ज किए गए. डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव हार जाने के बाद आने वाले राष्ट्रपति जो बाइडन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कोरोना से निपटना ही मानी जा रही है.

और यूरोप फिर बन रहा है हॉटस्पॉट?
पिछले एक से दो महीनों में कुछ राहत के बाद यूरोप के देश फिर एक बार चिंता में डूब गए हैं. सेकंड वेव से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश फ्रांस है, जहां 15 नवंबर तक करीब सवा छह लाख नए केस दर्ज हुए हैं, जो अक्टूबर के मुकाबले 46 फीसदी से ज़्यादा आंकड़ा है. इसी तरह, इटली में अक्टूबर की तुलना में केस 76.7 फीसदी बढ़ गए और करीब 5 लाख केस इस महीने दर्ज हो चुके हैं. यूके और पोलैंड में साढ़े तीन लाख से ज़्यादा केस इस महीने दर्ज हो चुके हैं. यूके में तो पिछले महीने के मुकाबले दोगुने से ज़्यादा केस अब तक आ चुके हैं.

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स्पेन में पिछले महीने के मुकाबले नए केस इस महीने एक चौथाई गुना ज़्यादा दिखे हैं तो जर्मनी 52 फीसदी से ज़्यादा केस 15 नवंबर तक देखे गए. तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो फ्रांस में भारत के बराबर केस आ रहे हैं तो इटली, यूके और पोलैंड में ब्राज़ील से ज़्यादा. महामारी विशेषज्ञों की चेतावनी के मुताबिक सर्दियों के आते ही यूरोप में संक्रमणों के बढ़ने का सि​लसिला तेज़ी से शुरू हो चुका है. कई देशों में लॉकडाउन और शटडाउन की नौबत फिर आ रही है.

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एक तरफ, वैक्सीन को लेकर लगातार खबरें बनी हुई हैं तो दूसरी तरफ, दुनिया के कई देशों में सेकंड और थर्ड वेव के चलते संक्रमणों और मौतों के आंकड़े बदस्तूर जारी हैं. इन नंबरों से साफ ज़ाहिर है कि जब तक वैक्सीन वाकई बड़े पैमाने पर मुहैया नहीं हो जाती, लॉकडाउन के साथ ही कोविड से जुड़ी तमाम सावधानियां बरतने की ज़रूरत सख़्ती से पेशतर रहेगी.



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