कहीं आपको तो नहीं हुआ लो-ग्रेड फीवर? जानें कैसे होते हैं इसके लक्षण
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कहीं आपको तो नहीं हुआ लो-ग्रेड फीवर? जानें कैसे होते हैं इसके लक्षण

कोरोना काल (Corona) में जब भी किसी को हल्का सा भी बुखार होता है, तो लगता है कि कहीं कोविड तो नहीं हो गया. जरूरी नहीं कि बुखार होने का कारण कोरोना ही हो, कई अन्य कारणों, इंफेक्शन या शारीरिक समस्याओं से भी आपको बुखार हो सकता है. हालांकि, बार-बार बुखार हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. सामान्य रूप से एक व्यक्ति के शरीर का तापमान लगभग 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है, लेकिन दिन भर इसमें उतार-चढ़ाव होता रहता है. बुखार तब होता है, जब तापमान सामान्य रेंज से ऊपर चला जाए. कई बार जब शरीर का तापमान 99 डिग्री फारेनहाइट हो जाता है, तो बुखार जैसा अंदर से महसूस होने लगता है. वहीं, लो-ग्रेड फीवर या कम श्रेणी के बुखार (Low-Grade fever) को अधिकांश एक्सपर्ट 99 फारेनहाइट और 100.3 फारेनहाइट के बीच के तापमान के रूप में परिभाषित करते हैं. कुछ चिकित्सक निम्न श्रेणी के बुखार को शरीर के तापमान के रूप में 100 F से 102 F तक के रूप में संदर्भित करते हैं.

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लो-ग्रेड फीवर के लक्षण
वेरीवेलहेल्थ डॉट कॉम में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, शरीर का तापमान अधिक होने के बावजूद भी कुछ निम्न-श्रेणी के बुखार वाले लोगों में लक्षण नहीं नजर आते हैं. हालांकि, लो-ग्रेड फीवर में निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं:

  • छूने पर शरीर गर्म लगना
  • सिर दर्द
  • थकान
  • मांसपेशियों में दर्द
  • पसीना आना
  • ठंड लगना
  • कपकपी महसूस करना
  • भूख में कमी
  • कम पेशाब होना
  • डिहाइड्रेशन
  • अंदर से अच्छा महसूस ना करना

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लो-ग्रेड बुखार के कारण
चाहे कोई भी बुखार हो, यहां तक ​​कि एक निम्न-श्रेणी का भी बुखार होना इस बात का संकेत है कि आपके शरीर में कोई ना कोई समस्या है. बुखार होना इस बात की तरफ इशारा करता है कि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस, जीवाणु या अन्य बाहरी कारक द्वारा किए गए हमले के खिलाफ रक्षा कर रही है. शरीर के तापमान में वृद्धि के साथ शरीर इंफेक्शन और बीमारियों के प्रति प्रतिक्रिया करता है, लेकिन कुछ रोग पैदा करने वाले कीटाणुओं के उच्च तापमान में पनपने की संभावना कम होती है, इसलिए लो-ग्रेड फीवर होता है. कुछ अन्य कारण जैसे वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन, नॉन-इंफेक्शियस बीमारी, ऑटोइम्यून डिजीज, स्ट्रेस, वैक्सीनेशन, खास तरह की दवाओं के प्रति संवेदनशील होना, कैंसर, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन आदि कारणों से भी लो-ग्रेड फीवर हो सकता है.

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