कई तरह की थेरैपी के बारे में हम सुनते हैं लेकिन क्या आपने कलर थेरैपी (Color Therapy) के बारे में कभी सुना है? कलर थेरैपी रंगों का उपयोग कर बीमारियों को ठीक करने की चिकित्सा विधि है. इसे क्रोमोथेरैपी (Chromo therapy) भी कहा जाता है. शरीर के किसी भाग पर किसी रंग को चमकाते हुए इस थेरैपी को किया जाता है. इसके अलावा आंखों द्वारा किसी विशेष रंग की तरफ देखते हुए भी इस थेरैपी को किया जाता है. आंखों को किसी अतिरिक्त दबाव से बचाने के लिए इसे काफी सावधानी से किया जाता है. यह मेडिकल केयर का हिस्सा नहीं है...
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कलर थेरैपी करती है चुटकियों में कमाल, जानें क्या है और इसे कैसे किया जाता

कलर थेरैपी कैसे करती है काम?
कलर थेरैपी में सूर्य की किरणों को किसी ख़ास रंग के ग्लास से पार कराते हुए मरीज के सिर पर टकराया जाता है. उदाहरण के लिए गर्मी में किसी को बुखार है, तो शरीर का तापमान बढ़ता है जिसका मतलब शरीर में लाल रंग अधिक हुआ है. अब मरीज के कमरे को बंद करते हुए खिड़की पर ब्लू ग्लास लगा दिया जाए, सूर्य की किरणें उससे टकराने के बाद पेशेंट के सिर तक पहुंचेगी और इससे फीवर ठीक हो जाएगा. ठीक इस तरह अगर खिड़की से थेरैपी के लिए कोई सक्षम नहीं है, तो ग्लास का बॉक्स बनाकर उसमें दूध, पानी, तेल आदि चीजें डालकर रख दें. ध्यान रखने वाली बात यह है कि ग्लास बॉक्स का रंग वही होना चाहिए जिस रंग की किरणें आप पेशेंट को देना चाहते हैं. बॉक्स से किरणें गुजरकर पदार्थ पर जाएगी और यह दवा के रूप में काम करेगा. यह ज्यादा जटिल प्रक्रिया नहीं है. (photo credit: pexels/Sharon McCutcheon)



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