एडिसन बीमारी के उपचार में ओरल हार्मोनल थेरेपी दी जा सकती है.
स्वास्थ्य

एडिसन बीमारी में समय पर कराएं इलाज, नहीं तो हो सकती है बड़ी परेशानी

एडिसन बीमारी (Addison Disease) एंडोक्राइन या हार्मोन (Hormone) उत्पादन प्रणाली से जुड़ा एक दुर्लभ विकार है. इसे आमतौर पर एंड्रेनल इंसफिशिएंसी भी कहते है. इसमें कोर्टिसोल और एल्डोस्टेरोन जैसे हार्मोन की मात्रा में कमी आ जाती है. यह बीमारी आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होती है. करीब 15,000 लोगों में से किसी एक को एडिसन की बीमारी होती है, इसलिए यह एक दुर्लभ स्थिति है. यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं को लगभग दो से तीन गुना ज्यादा प्रभावित करती है, क्योंकि महिलाओं में ऑटोइम्यूनिटी (Auto Immune) अधिक आम है. एडिसन की बीमारी की शुरुआत 30 से 50 वर्ष के बीच होती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकती है. अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे कि ग्रेव्स डिजीज, हाइपोथायरायडिज्म, टाइप 1 डायबिटीज और विटिलिगो से ग्रसित लोगों को ऑटोइम्यून एडिसन बीमारी होने का खतरा अधिक होता है.

जिन लोगों को ऑटोइम्यून एडिसन की बीमारी है, उनमें अक्सर थायरॉयड या अन्य ऑटोइम्यून बीमारियां फैमिली हिस्ट्री से जुड़ी होती हैं.

ऐसे होते हैं लक्षणmyUpchar के अनुसार, एडिसन बीमारी के लक्षणों में बहुत ज्यादा थकान, वजन में कमी, भूख में कमी, ब्लड प्रेशर कम होना, मतली या उल्टी, नमकीन खाद्य पदार्थों को खाने की तेज इच्छा करना, हाइपरपिग्मेंटेशन, डिप्रेशन, पेट में दर्द, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द इसके अलावा कुछ मामलों में बेहोशी भी शामिल है. महिलाओं में इन लक्षणों के अलावा अनियमित पीरियड्स की भी शिकायत हो सकती है.

ऐसे होगा निदान

शुरुआती चरणों में एडिसन बीमारी का निदान कठिन हो सकता है. हालांकि, लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री (चिकित्सक द्वारा पिछली बीमारियों व उनके इलाज से जुड़े प्रश्न पूछना) के आधार पर डॉक्टर शारीरिक जांच कर सकते हैं. इसके बाद वे हॉर्मोन की स्तर की जांच के लिए बायोकेमिकल लेबोरेटरी टेस्ट और कैल्शियम डिपोजिशन की जांच के लिए एब्डोमिनल और पेल्विक वाले हिस्सो का एक्स-रे करवाने की सलाह दे सकते हैं. वे एंड्रेनोकोर्टिकोट्रॉफिक हार्मोन सिम्युलेशन टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं, जिसमें कोर्टिसोल के उत्पादन का पता चलता है.

उपचार के ये हैं तरीके

एडिसन बीमारी के उपचार में ओरल हार्मोनल थेरेपी दी जा सकती है. इसमें दी जाने वाली दवाइयां उन हॉर्मोन्स को रिप्लेस करती हैं, जो एड्रेनल ग्रंथि को बनाने में मदद करती हैं. डॉक्टर इस स्थिति में ओरल हाइड्रोकोर्टिलसोन टैबलेट्स या मिनरलकॉर्टिकॉइड्स दे सकते हैं. वे नसों के अंदर हाइड्रोकोर्टिलसोन के इंजेक्शन लगवाने के लिए भी कह सकते हैं, जिससे तेजी से सुधार हो सकता है.

अनदेखा न करें बीमारी को

यदि इस बीमारी को लंबे समय तक अनदेखा कर दिया जाता है या जरूरत के अनुसार उपचार और दवा का प्रयोग नहीं किया जाता, तो एडिसन बीमारी में ऑर्गन फेलियर (किसी अंग का सही से कार्य न करना) जैसी घातक समस्या हो सकती है. इसके उपचार में तत्काल हाइड्रोकार्टिसोन इंजेक्शन, फ्लूइड और शुगर रिप्लेसमेंट और सावधानीपूर्वक मरीज की स्थिति को मॉनिटर करना शामिल है. जब ठीक से मॉनिटरिंग की जाती है, तो उपचार से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है, हालांकि एडिसन की बीमारी एक आजीवन प्रभावित करने वाली स्थिति है, ऐसे में रोजाना मेडिकेशन (ध्यान लगाना) करने से बहुत फायदा हो सकता है और मरीज सामान्य लोगों की तरह जीवन जी सकते हैं.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ग्रोथ हार्मोन की कमी पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.



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