Diwali 2020: मिट्टी के दीयों से रोशन करें घर. Image Credit:Pexels/Udayaditya-Barua
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इस बार मनाएं ईको-फ्रेंडली दिवाली, घर के हर कोने को करें रोशन

Diwali 2020: दिवाली दीपों का त्योहार है, जिसे भारत (India) में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है. इस त्योहार में लोग पटाखों और दीयों की रोशनी से पूरे माहौल को जगमगा कर अपनी खूशियों को आपस में बांटते हैं. हालांकि इस त्‍योहार को मानते हुए हमें पर्यावरण (Environment) का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए. हर साल दीवाली पर पटाखे, केमिकल युक्त चीजें, प्लास्टिक (Plastic) इत्‍यादि का इस्‍तेमाल बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है. इस दौरान वायु और ध्‍वनि प्रदूषण (Noise Pollution) का स्‍तर बढ़ जाता है. इसलिए पर्यावरण और सेहत (Health) को ध्‍यान में रखते हुए हमें प्रदूषण मुक्त दिवाली मनानी चाहिए. तो आइए, हम पर्यावरण के अनुकूल या ईको-फ्रेंडली दिवाली (Eco Friendly Diwali) मनाने की ओर कदम बढ़ाएं. निम्नलिखित बातों का ध्यान रखकर हम ईको-फ्रेंडली दिवाली मना सकते हैं और अपनी खुशियों में चार चांद लगा सकते हैं.

मिट्टी के दीयों का करें इस्तेमाल
इस बार दिवाली में इलेक्ट्रिक लाइट्स का प्रयोग करने के बजाय मिट्टी के दीयों का प्रयोग कर घर को रोशन करें. आपके द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले मिट्टी के दीयों से न सिर्फ पर्यावरण के नुकसान होने के बचाव होगा, बल्कि कुम्हार और छोटे व्‍यापारियों को आर्थिक मदद भी मिलेगी. मिट्टी के दीयों के प्रयोग से बिजली की भी बचत होगी.

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बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए हमें पूजा करने के लिए ईको-फ्रेंडली मूर्तियों का ही प्रयोग करना चाहिए. मिट्टी से बनी मूर्तियां पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचातीं और समय के साथ मिट्टी में पूरी तरह मिल जाती हैं. वहीं प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां नष्ट नहीं होती है, जिससे ना सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है बल्कि इन्हें जहां-तहां फेंके जाने से आपकी भावना को भी ठेस पहुंचती है. पूजन के लिए बाजार में लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की ईको-फ्रेंडली मूर्तियां आसानी से मिल जाती हैं.

तेज धमाके और अधिक धुएं वाले पटाखों से बचें
तेज धमाके और अत्यधिक धुएं वाले पटाखों का इस्तेमाल ना करें. इससे ध्वनि प्रदूषण और वायुमंडल में धुएं फैल जाते हैं, जो पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक होता है. पर्यावरण को अपने पूर्व की स्थिति में आने वाले लंबा समय लग जाता है. इसके अलावा इन सबसे बुजुर्गों और अस्थमा व दिल के मरीजों की जान पर बन आती है. इसलिए पटाखों से बचें और अगर पटाखे छोड़ने ही हैं तो फुलझड़ी और छोटे, कम आवाज एवं धुएं वाले पटाखों का इस्तेमाल करें.

रंगोली में केमिकल वाले रंगों का इस्‍तेमाल ना करें

दिवाली में घर में रंगोली बनाना शुभ माना जाता है, इसलिए लगभग भारत के हर घर में रंगोली बनाई जाती है. रंगोली बनाने के लिए कई तरह के रंगों का प्रयोग किया जाता है. ये रंग ज्यादातर केमिकल वाले होते हैं. ये आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक होते हैं. इसलिए इस दिवाली ऐसे रंगों से दूरी बनाएं और इसकी जगह नेचुरल कलर्स खरीदकर उससे रंगोली बनाएं.

गाय के गोबर से बने दीयों का करें इस्‍तेमाल
आजकल बाजार में गाय के गोबर से बने दीये उपलब्ध हैं, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद होते हैं. ये दीये गोबर में घी और जरूरी तेल डालकर बनाए जाते हैं, जिसमें लेमन ग्रास और मिंट जैसे उत्पादों का भी मिश्रण होता है.

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इको फ्रेंडली मोमबत्तियां
बाजार में इको-फ्रेंडली मोमबत्तियां भी उपलब्‍ध होती हैं, जिससे पर्यावरण को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता. इसलिए इस बार दिवाली में अपने घर इको-फ्रेंडली मोमबत्तियों का इस्तेमाल करें और घर के हर कोने को रोशन करें.



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