आपकी गट हेल्थ भी हो सकती है प्रेग्नेंसी में आ रही है दिक्कत की वजह - स्टडी
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आपकी गट हेल्थ भी हो सकती है प्रेग्नेंसी में आ रही है दिक्कत की वजह – स्टडी

Gut Health and Pregnancy problem: दुनियाभर में हुई कई स्टडीज में ये बात साबित हो चुकी है कि कैसे नॉर्मल गट माइक्रोबायोटा (gut microbiota) ओवरऑल हेल्थ और यहां तक कि मेंटल हेल्थ के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. आपको बता दें कि गट माइक्रोबायोटा बैक्टीरिया सहित इंसान की आंतों में रहने वाले माइक्रोऑर्गेनिज्म (सूक्ष्मजीवियों) की सबसे बड़ी आबादी होती है. लेकिन, अब एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि महिलाओं को कंसीव (गर्भ धारण) करने में मदद करने के लिए गुड गट बैक्टीरिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के आणंद स्थित आकांक्षा हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (एएचआरआई) की डॉ. नयना पटेल और डॉ. भाविन पारेख और गांधीनगर के गुजरात बायोटेक्नोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर (GBRC) से प्रोफेसर चैतन्य जोशी और डॉ. निधि पटेल द्वारा की गई इस स्टडी, ‘इम्प्लांटेशन फेलियर और अस्पष्ट इनफर्टिलिटी वाली महिलाओं में विशिष्ट आंत और वेजाइनल माइक्रोबायोटा प्रोफाइल’ का निष्कर्ष हाल ही में ‘बीएमसी वुमेन हेल्थ (BMC Women’s Health)’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

स्टडी में क्या निकला
इस स्टडी के दौरान आसान प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं, अस्पष्ट इनफर्टिलिटी वाली महिलाओं और बार-बार इम्प्लांटेशन फेलियर का सामना करने वाली महिलाओं में बैक्टीरिया के कम्पोजिशन की तुलना की गई. स्टडी में ऐसे संकेत मिले हैं कि जिन महिलाओं को कंसीव करने में कठिनाई होती है, उनमें एक्टिनोबैक्टीरिया ग्रुप और बिफीडोबैक्टीरिया जैसे ‘अच्छे बैक्टीरिया’ की सांद्रता (concentration) कम होती है. दूसरी ओर, इन महिलाओं की आंत में कंसीव करने वाली महिलाओं की तुलना में हंगटेला (hungatella) जैसे बैक्टीरिया की मात्रा ज्यादा होती है. स्टडी में वेजाइनल बैक्टीरिया को भी ध्यान में रखा गया, लेकिन कंसन्ट्रेशन, जो आंत से कम डाइवर्स था, उसने कोई अहम भूमिका नहीं निभाई.

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IVF सहित इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट से जुड़े नतीजे कैसे हैं?
एएचआरआई में इनफर्टिलिटी मेडिसिन साइंटिस्ट डॉ. पारेख ने कहा कि आंत में रहने वाले माइक्रोब (सूक्ष्म जीवों) की संख्या ह्यूमन बॉडी में सेल्स की संख्या से कहीं ज्यादा है. उन्होंने आगे कहा. “हंगटेला उदाहरण के लिए ट्राइमेथिलैमाइन एन-ऑक्साइड (टीएमएओ) प्रोड्यूस करता है, जो बॉडी के लिए हानिकारक है. इसके कंसन्ट्रेशन से ब्लड क्लॉट भी बन सकते हैं. गट माइक्रोबायोटा हमारे इम्यून सिस्टम में सहायता करता है और एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन को कंट्रोल करता है, जो सफल गर्भावस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, ”

क्या कहते हैं जानकार
इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट के परिणामों के दूरगामी प्रभाव पड़ते हैं. डॉ. नयना पटेल ने कहा कि इस स्टडी का आइडिया कई उदाहरणों के साथ आया, जहां कुछ महिलाओं में तीन से चार साइकल बिना किसी स्पष्ट कारण के विफल हो गए.

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डॉ. नयना पटेल ने आगे कहा, “अगर हम इस समस्या का दायरा देखें, तो आज भारत में 6 जोड़ों में से एक बच्चा पैदा करने में कठिनाई से पीड़ित है. ये स्टडी कम से कम ये देखने के लिए एक दिशा प्रदान करती है, जब भी आईवीएफ जैसे ट्रीटमेंट अपनी भूमिका में होंगे, उस वक्त एक महिला की ओवरऑल हेल्थ का आकलन करते समय गट हेल्थ जैसे अन्य कारकों पर भी विचार किया जाएगा.” उन्होंने आगे कहा कि ऐसा प्रोजेक्ट प्लान किया गया है, जिसमें नतीजे देखने के लिए महिलाओं के नेचुरल प्रोबायोटिक्स और अन्य दवाओं के साथ गट माइक्रोबायोटा हेल्थ के लिए इलाज किया जाएगा.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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