अभी तो समझना शुरू हुआ है कि कोरोना वायरस कितनी समस्याओं की वजह है!
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Covid-19 महामारी के दुनिया में कुल मरीज़ों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच गई है और अब कहीं जाकर यह Report आई है कि Scientists इस बीमारी के मरीज़ों की सेहत पर क्या असर (Covid Effects on Health) खोज पाए हैं. संक्रामक रोगों के विशेषज्ञों के मुताबिक Coronavirus संक्रमण के कुछ प्रभाव तो मरीज़ की सेहत को लंबे समय तक प्रभावित करते हुए भी दिख रहे हैं. एक्सपर्ट ने इस वायरस के सेहत पर क्या असर अब तक समझे हैं, यह जानना बहुत फायदेमंद है.

सिर्फ सांस नहीं कई अंगों पर वायरस का असर
ये तो आप अब तक जान ही चुके हैं कि कोरोना वायरस सांस की तकलीफ का बड़ा कारण है और सांस के रोगियों को न केवल जल्दी बल्कि गंभीर रूप से अपनी चपेट में लेता है. साथ ही यह वायरस मरीज़ के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. कैलिफोर्निया के एक रिसर्च इंस्टिट्यूट स्क्रिप्स के डॉ. एरिक टोपोल के मुताबिक पहले लगा था कि यह सांस संबंधी वायरस है लेकिन यह पेंक्रियास, हृदय से लेकर लिवर और मस्तिष्क तक को प्रभावित कर रहा है.

कैसे अंगों को नुकसान पहुंचा रहा है वायरस?कोविड 19 के मरीज़ों को ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो सकती है, जो स्ट्रोक का कारण बन सकती है. विशेषज्ञों के हवाले से आ रही स्टडीज़ के मुताबिक इस वायरस से तेज़ जलन की समस्या कुछ मरीज़ों में दिखी जो कई अंगों को एक साथ डैमेज करने का कारण बन सकती है.

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इसके अलावा, वायरस न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा कर रहा है, सिरदर्द से लेकर स्वाद व गंध की ताकत क्षीण होने से उद्वेग और भ्रांति जैसी मनोवैज्ञानिक मुश्किलें खड़ी हो रही हैं. एक और मुसीबत यह है कि इस वायरस से पीड़ित होने के बाद रिकवरी बेहद धीमी, अधूरी और महंगी प्रक्रिया है, जो जीवन पर असर डालती है.

शिकागो बेस्ड कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सादिया खान के मुताबिक हृदय रोगों की स्थिति इस वायरस से बेहद खतरनाक हो रही है. डॉ. खान का मानना है कि कोविड 19 से ग्रस्त होने के बाद जो मरीज़ ठीक भी हो जाएंगे, उनके जीवन में स्वास्थ्य पर खर्चा बेतहाशा बढ़ जाएगा.

ठीक हो पाना कितना मुश्किल है?
अगर कोई कोविड मरीज़ आईसीयू या वेंटिलेटर पर गया तो उसका काफी हद तक ठीक हो पाना लंबा समय मांगता है. डॉ. खान के हिसाब से इस समय का आंकलन इस तरह है कि जितने दिन आप आईसीयू या वेंटिलेटर रहेंगे, उसे सात से गुणा करें तो उतने दिन ठीक होने में लगेंगे. यानी आप 7 दिन वेंटिलेटर पर रहे तो आपको लगभग सामान्य होने में करीब 50 दिन लगेंगे. इस पर दिक्कत यह भी है कि आपकी उम्र जितनी ज़्यादा है, उतनी कम संभावना है कि आपका शरीर पहले जैसी क्षमता पर लौट सके.

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अभी तो असर समझने की शुरूआत है!
जी हां, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ डॉक्टर अभी सिर्फ छुटपुट मामलों के अध्ययन से कुछ समझ बना सके हैं. अमेरिका के सीडीसी के संक्रामक रोग विभाग के जे बटलर की मानें तो कोरोना वायरस के लंबे समय के प्रभावों को समझने के लिए अध्ययन अभी हो रहे हैं. अभी से कोई नतीजा बताना मुमकिन नहीं है.

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की डॉ. हेलेन सैलिस्बरी के मुताबिक कुछ मरीज़ों में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं कि वो कभी पहले जैसी सेहत नहीं पा सकेंगे. दूसरी तरफ, न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. इगोर कोरालनिक की मानें तो अब तक जितना डेटा है, उसके हिसाब से करीब आधे मरीज़ों में चकराने, ध्यान कम होने, कम सतर्क रह पाने, गंध व स्वाद में समस्या, उद्वेग, दौरे, कमज़ोरी और मसल्स पेन जैसी शिकायतें बनी हुई पाई गई हैं.

एक तरफ कोरालनिक जैसे विशेषज्ञ अपने स्तर पर यह अध्ययन कर रहे हैं कि क्या कोविड 19 मरीज़ों में ये समस्याएं कुछ समय के लिए हैं या परमानेंट, तो वहीं खान जैसे कुछ डॉक्टर ये देख रहे हैं कि कहीं यह वायरस एचआईवी की तरह तो नहीं, कि एक बार रोग हो गया तो बस हो गया.



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