अनानास का अर्क अल्जाइमर के इलाज में हो सकता है मददगार - स्टडी
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अनानास का अर्क अल्जाइमर के इलाज में हो सकता है मददगार – स्टडी

बुढ़ापे में होने वाली भूलने की बीमारी अल्जाइमर (Alzheimer’s) दुनिया के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है. पश्चिमी देशों में 50 के बाद अधिकांश लोग इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं. इसमें याददाश्त कमजोर होने लगती है और अक्सर लोग भूलने लगते हैं. अब एक एक हालिया स्टडी में पता चला है कि अनानास के तने का अर्क (Pineapple Stem Extract) अल्जाइमर से लड़ने में मददगार हो सकता है.आपको बता दें कि अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है. इसमें सामान्य तौर पर धीरे-धीरे मेमोरी पॉवर कमजोर होने लगता है. ऐसा ब्रेन में एमिलाइड-बीटा प्रोटीन के लेवल में बढ़ोतरी की वजह से होता है. गंभीर अवस्था में पीड़ित अपनी एक्टिविटी पर काबू नहीं रख पाता. इस बीमारी का अब तक कोई ठोस इलाज नहीं है. कुछ थेरेपी की मदद से इसे काबू में लाने की कोशिश की जाती है, लेकिन पूरी तरह से इस बीमारी को वैज्ञानिक समझ भी नहीं पाए हैं

पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (Lovely Professional University) के रिसर्चर्स ने स्टडी के दौरान पाया कि मौजूदा इलाज अल्जाइमर पीडि़तों के क्वालिटी ऑफ लाइफ के मैनेजमेंट में प्रभावी नहीं है. इस स्टडी में बताया गया है कि चूहों पर प्रयोग के दौरान पाया गया कि ब्रोमेलैन (Bromelain) नामक कंपाउंड अल्जाइमर के लक्षणों में सुधार ला सकता है. स्टडी का निष्कर्ष न्यूरोटाक्सिकोलाजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

क्या कहते हैं जानकार
एलपीयू के स्कूल आफ फार्मास्युटिकल साइंस में प्रोफेसर और इस स्टडी के ऑथर नवनीत खुराना (Navneet Khurana) के अनुसार, “हमें ब्रोमेलैन के जरिये इलाज के बाद चूहे के दिमाग में बीटा-सीक्रेटेज एंजाइम, बीटा-एमिलाइड, दिमाग से उत्पन्न न्यूरोट्राफिक फैक्टर, ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर-अल्फा व इंटरल्यूकिन-6 के लेवल में जरूरी सुधार देखा गया.

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प्रो खुराना ने आगे बताया, “हिस्टोपैथोलाजिकल विश्लेषण में ब्रोमेलैन के जरिये इलाज से चूहों के न्यूरांस की संरचनाओं में भी सुधार के संकेत मिले. इन परिणामों ने ब्रोमेलैन के जरिये अल्जाइमर के इलाज की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया है.”

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वहीं, एलपीयू में स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर राकेश कुमार (Rakesh Kumar) ने कहा, “ये बायोमोलेक्यूल, ब्रोमेलैन, अल्जाइमर रोग के इलाज के लिए एक आशाजनक चिकित्सीय प्रतीत होता है. इसे एक फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन में परिवर्तित किया जा सकता है, जो अल्जाइमर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है. यहां तक कि जूस के रूप में इस बायोमोलेक्यूल (Biomolecule) के नियमित सेवन से भी अल्जाइमर के रोगियों को उनकी स्थिति में सुधार करने में फायदा हो सकता है, लेकिन इसके क्लिनिकल यूज की गारंटी के लिए इस दिशा में आगे की स्टडी की जरूरत है.”

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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