अजन्‍मे बच्‍चों के लिए कोकीन के नशे से भी ज्‍यादा खतरनाक है मां का यह ‘नशा’
स्वास्थ्य

अजन्‍मे बच्‍चों के लिए कोकीन के नशे से भी ज्‍यादा खतरनाक है मां का यह ‘नशा’

नई दिल्ली. इस बात से शायद ही कोई इनकार करे कि गर्भावस्‍था के दौरान मां की सोच का असर भी उसके गर्भ में पल रहे बच्‍चे पर पड़ता है. इसीलिए, गर्भावस्‍था के दौरान मां को अच्‍छा खाने, अच्‍छा देखने, अच्‍छा पढ़ने, अच्‍छा सोचने और ज्‍यादा से ज्‍यादा खुश रहने की सलाह दी जाती है. इसके ठीक विपरीत, महिलाओं का एक वर्ग ऐसा भी है, जो न केवल गर्भावस्‍था से पहले, बल्कि गर्भावस्‍था के दौरान भी तरह-तरह के नशे के सेवन की लत में फंसा रहता है.

इन नशों में सिगरेट और शराब का सेवन सबसे कॉमन है. ऐसे में, गर्भावस्‍था के दौराना मां द्वारा किया गया नशा ना केवल अजन्मे बच्‍चे की सेहत पर दुष्‍प्रभाव डालता है, बल्कि कई बार गर्भपात की वजह भी बन जाता है.

सीड्स ऑफ इनोसेंस एंड जेनेस्ट्रिंग डायग्नोस्टिक्स की निदेशक डॉ. गौरी अग्रवाल के अनुसार, ‘शराब और सिगरेट का सेवन ना केवल गर्भवती महिला, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्‍चे के लिए भी बहुत खतरनाक हो सकता है.’ उनके अनुसार आपको यह जानकर हैरानी होग‍ी कि गर्भवती महिला द्वारा शराब और सिगरेट का सेवन अजन्‍मे बच्‍चे के लिए हेरोइन, कोकीन और मारिजुआना से भी ज्‍यादा खतरनाक हो सकता है.

इतना ही नहीं, नशे की यह आदत मां और बच्‍चे के लिए शारीरिक, व्यवहारिक और बौद्धिक समस्याओं का कारण भी बन सकती है, लिहाजा महिलाओं को गर्भावस्‍था से पहले और गर्भावस्‍था के दौरान शराब-सिगरेट के सेवन से परहेज करना चाहिए.

धूम्रपान करने वालों से रहे दूर
डॉ. गौरी अग्रवाल के अनुसार, ‘ऐसी महिलाओं को धूम्रपान करने वाले लोगों से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए, फिर चाहे ये लोग सहकर्मी हों, दोस्त हों, परिवार के सदस्य हों या पब्लिक प्लेस में कोई अजनबी हों.’ दरअसल, धूम्रपान करने वाली मां द्वारा निकोटिन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कई अन्य पदार्थ भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

इसलिए जरूरी है कि गर्भवती महिलाएं न केवल शराब और धूम्रपान, बल्कि इस तरह का नशा करने वालों से भी दूर रहे. गर्भावस्था के दौरान कैफीन का सेवन भी कम या खत्म कर देना चाहिए. कई स्टडी में पाया गया है कि 2- 3 कप से ज्यादा कैफीन के सेवन से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है.

गर्भवती महिलाएं इन बातों का भी रखें ध्‍यान
डॉ. गौरी अग्रवाल के अनुसार, ‘मौसमी बीमारियों की चपेट में आने पर गर्भवती महिला का स्वास्थ्य मौसम के कारण ख़राब होता है. इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि गर्भवती महिलाएं संक्रमण से बचने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं. उन्हें खुद की अच्छी साफ़-सफाई रखनी चाहिए. अपने कमरों में कीट पतंगों को मारने के लिए दवाइयां रखनीं चाहिए. डेंगू और मलेरिया के मौसम में पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए और निवारक टीकाकरण के संबंध में अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना चाहिए. अगर महिला को संक्रमण हो जाता है, उन्हें जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाना चाहिए.’

Tags: Health tips, News18 Hindi Plus, Pregnancy, Sehat ki baat

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