अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस क्यों मनाया जाता है
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अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस क्यों मनाया जाता है, जानें इतिहास और महत्व

अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस क्यों मनाया जाता है

International Stammering Awareness Day: अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस पर इस साल के लिए “शब्दों की यात्रा, लचीलापन और वापसी” (Journey of Words, Resilience and Bouncing Back) थीम रखी गई है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 22, 2020, 1:07 PM IST

अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस (International Stammering Awareness Day): हर साल 22 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस (International Stuttering Awareness Day) मनाया जाता है. हकलाना एक बोलने से सम्बंधित एक विकार है जिसके प्रति जागरूकता के लिए यह दिन मनाया जाता है. कई बार इंसान बोलते समय हकलाने पर असहज महसूस करता है, लोगों को उनका मजाक भी बनाते हुए देखा जाता है. इससे वह इंसान भावनात्मक रूप से मायूस महसूस करता है. भारत में भी हकलाहट से 1.5 फीसदी लोगों के ग्रसित होने का दावा किया जाता है. हर दिन हकलाहट से ग्रसित लोगों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. बोलने के इस विकार में यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाता कि व्यक्ति क्या कहना चाहता है

अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस का इतिहास
अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस सबसे पहले 1998 में नामित किया गया था. जागरूकता के एक अभियान के रूप में इसे मनाने का फैसला लिया गया था. इसे सामाजिक चिंता मानते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का फैसला लिया गया. यह अंतरराष्ट्रीय स्टटरिंग एसोसिएशन (International Stuttering Association), इंटरनेशनल फलूएन्सी एसोसिएशन (International Fluency Association) और यूरोपियन लीग ऑफ़ स्टटरिंग एसोसिएशन (European League of Stuttering Associations) के तत्वाधान में शुरू किया गया अभियान है.

इस साल के लिए विषय या थीमबोलने से सम्बंधित अभियान होने के कारण इसका थीम भी इससे जुड़ा हुआ है. हर साल अलग-अलग थीम इसके लिए निर्धारित की जाती है. इस बार भी एक अलग थीम का निर्धारण किया गया है. इस साल के लिए “शब्दों की यात्रा, लचीलापन और वापसी” (Journey of Words, Resilience and Bouncing Back) थीम रखी गई है.

अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस का महत्व
निश्चित रूप से यह दिन एक अलग अहमियत रखता है. लोगों को शिक्षित करने के लिए इससे बेहतर दिन नहीं हो सकता. हकलाहट से ग्रसित लोगों को उस शर्मिंदगी से बाहर लाने के लिए अहम है, जो वे रोजमर्रा के जीवन में झेलते हैं. भावनात्मक सपोर्ट के अलावा हकलाहट के इलाज पर चर्चा करने वाली संगोष्ठियों का आयोजन भी इस दिन होता है. इस पर खुलकर बात की जाती है इसलिए हकलाहट जागरूकता दिवस की अलग अहमियत हो जाती है. उन लाखों लोगों के जीवन में जागरूकता से नई रोशनी आ सकती है.

हकलाहट का इलाज
हकलाहट का इलाज करने में दो तरीके अपनाए जाते हैं. इनमें पहला स्पीच थेरेपी है जिसमें डॉक्टर बोलने की गति में कमी लाने की बात कहते हैं. इसके अलावा यह भी ध्यान दिया जाता है कि व्यक्ति विशेष तौर पर कौन से शब्द पर अटकता है. इसके अलावा दूसरे तरीके को कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी कहा जाता है. यह एक साइकोथेरेपी है जिससे इंसान में बोलने की शक्ति और बर्ताव करने में सुधार आता है.



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